लगातार बारिश से सुखानी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा

बीडीओ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते लोग
बीडीओ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते लोग
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नागराकाटा: लगातार हो रही बारिश के बीच रविवार देर रात सुखानी नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ गया, जिससे नागराकाटा ब्लॉक में बाढ़ जैसे गंभीर हालात उत्पन्न हो गए। कुछ ही घंटों में ब्लॉक मुख्यालय के कई इलाके जलमग्न हो गए, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। कई घरों में पानी घुस गया, यहां तक कि नागराकाटा थाना परिसर भी जलभराव से प्रभावित हुआ। स्थिति बिगड़ने पर कई परिवार रात में ही घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए। यह घटना लोगों को पिछले वर्ष 5 अक्टूबर की विनाशकारी बाढ़ की भयावह यादें फिर से ताजा कर गई। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सुखानी नदी का क्षतिग्रस्त तटबंध पहले से ही कमजोर था, जो अब पूरी तरह से बह चुका है। रविवार रात नदी का पानी उफान पर आकर सुखानी बस्ती, बाबूपाड़ा और विजय नगर सहित कई इलाकों में घुस गया। कई घर पूरी तरह जलमग्न हो गए, जिससे लोगों को पूरी रात सड़क पर गुजारनी पड़ी।

स्थानीय लोगों ने बीडीओ कार्यालय के बाहर धरना देकर स्थायी समाधान की मांग की

सोमवार को विजय नगर और सुखानी बस्ती के निवासियों का एक प्रतिनिधिमंडल बीडीओ कार्यालय पहुंचा और धरना प्रदर्शन कर स्थायी समाधान की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मजबूत तटबंध निर्माण, नदी किनारे अवैध निर्माणों को हटाने, नदी की ड्रेजिंग तथा जल निकासी नालियों की सफाई की मांग उठाई।

स्थानीय निवासी संजीवन कुजूर ने कहा कि यह समस्या हर वर्ष सामने आती है और इस बार इसकी गंभीरता और बढ़ गई है। वहीं बाढ़ पीड़िता दुर्गामणि राय ने बताया कि उनका घर बार-बार जलमग्न हो जाता है, लेकिन आज तक उन्हें सरकारी आवास नहीं मिला। विजय नगर निवासी एडिशन डेविड कछुआ ने बताया कि बाढ़ के कारण आंगनबाड़ी केंद्र की सामग्री सहित घरेलू सामान पूरी तरह नष्ट हो गया है। नागराकाटा के बीडीओ जयप्रकाश मंडल ने बताया कि सुखानी, मूर्ति, डायना और जलढाका नदियों की ड्रेजिंग का प्रस्ताव तैयार किया गया है तथा प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

लगभग 15 एकड़ चाय क्षेत्र जलमग्न, करीब 6 हेक्टेयर भूमि नदी कटाव में बह गई

लगातार हो रही भारी बारिश के कारण सुखानी नदी उफान पर आ गई है, जिससे नागराकाटा चाय बागान में व्यापक नुकसान हुआ है। बाढ़ और तेज कटाव के कारण लगभग 15 एकड़ चाय क्षेत्र जलमग्न हो गया है, जबकि करीब 6 हेक्टेयर भूमि नदी कटाव में बह चुकी है | जानकारी के अनुसार, रविवार रात बारिश के बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और पानी बागान के कई हिस्सों में फैल गया। सबसे अधिक नुकसान साउथ सुखनबाड़ी डिवीजन में हुआ है, जहां चाय के पौधे भारी मात्रा में क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नदी का तेज कटाव अब बागान की फैक्ट्री की ओर बढ़ रहा है, जिससे सुरक्षा दीवार के कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। यदि यह दीवार टूटती है तो फैक्ट्री परिसर में पानी घुसने का खतरा बढ़ जाएगा। इसके अलावा दो श्रमिक आवास लाइनों पर भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। बागान प्रबंधक राजेंद्र सिंह ने बताया कि लगातार बढ़ते जलस्तर और कटाव से स्थिति गंभीर होती जा रही है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत तटबंध निर्माण और कटाव-रोधी कार्य शुरू करने की मांग की है।

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