बदलते दौर की सच्चाई : डिग्री पर नहीं, स्किल पर नौकरी

मार्कशीट प्रमाणपत्र के बावजूद रोज़गार का दरवाज़ा है बंद
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सन्मार्ग संवाददाता

सिलीगुड़ी : वर्तमान में भारत में शिक्षा का स्तर पहले से कहीं अधिक ऊंचा है। सरकारी और निजी संस्थानों से हर साल लाखों छात्र बीए, बीकॉम, बीटेक, एमए, एमबीए जैसी डिग्रियां लेकर निकल रहे हैं। इनके पास मार्कशीट है, प्रमाणपत्र है, लेकिन अफ़सोस, रोज़गार का दरवाज़ा अब भी बंद है। बड़ी उम्मीदों और खर्चों के साथ मां-बाप अपने बच्चों को कॉलेज भेजते हैं, सोचते हैं कि पढ़-लिखकर उनकी ज़िंदगी संवर जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि डिग्री मिलने के बाद भी नौकरी की तलाश में भटकते युवाओं की फौज दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। फॉर्म भरने के पैसे हैं, लेकिन नौकरी नहीं। इंटरव्यू कॉल्स के वादे हैं, लेकिन अपॉइंटमेंट लेटर नहीं।

हर जगह अनुभव मांगा जाता है, लेकिन कोई पहला मौका देने को तैयार नहीं। यह सिर्फ एक आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक संकट भी बनता जा रहा है। डिग्रीधारी युवा डिलीवरी बॉय, सेल्समैन या छोटी-मोटी नौकरियों में लगने को मजबूर हैं, सिर्फ इसलिए कि उनके पास वो 'स्किल' नहीं जो कॉर्पोरेट या सरकारी दुनिया मांग रही है।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आज की शिक्षा सिर्फ डिग्री तक सीमित रह गई है? क्या स्किल ट्रेनिंग और इंडस्ट्री लिंक की कमी इसकी सबसे बड़ी वजह है? या फिर ये सिस्टम ही कुछ ऐसा बन चुका है जहां डिग्री सिर्फ दीवार की शोभा बनकर रह जाती है? इस पर सन्मार्ग के साथ सिलीगुड़ी वासियों ने अपनी राय सांझा की है।

क्या कहना है युवाओं का

मेहनत से डिग्री पाने के बाद भी नौकरी नहीं मिलती। केवल किताबों का ज्ञान नहीं, कौशल भी जरूरी है। सरकारी नौकरी कम है और निजी कंपनियां अनुभव मांगती हैं। बढ़ती जनसंख्या और प्रतिस्पर्धा से युवाओं की मुश्किलें बढ़ीं। कौशल विकास और स्टार्टअप बढ़ाने से बेरोजगारी कम हो सकती है। - सुरज छेत्री

डिग्री और डिप्लोमा के बाद भी युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा। बढ़ती जनसंख्या की तुलना में नौकरी कम हैं। शिक्षा का स्तर बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी। बेरोजगारी से तनाव, असमानता व अपराध बढ़ रहे हैं। जनसंख्या नियंत्रण, रोजगार-उन्मुख शिक्षा व स्टार्टअप से समाधान संभव है। - बिक्की प्रसाद

भारत में बढ़ती जनसंख्या से बेरोजगारी बढ़ी है। पढ़े-लिखे युवा नौकरी न मिलने से परेशान हैं। सरकार शिक्षा की स्तर बढ़ाकर समस्या का टाल रही है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है। आर्थिक संकट भी बढ़ रहा है। इसलिए आईटी, डिजिटल मार्केटिंग और साइबर सुरक्षा में प्रशिक्षण जरूरी है। - पल्लवी कुमारी

डिग्री होने के बावजूद नौकरी नहीं मिलना आज की सबसे बड़ी समस्या है। इससे आत्मविश्वास टूट रहा है। बेरोजगारी मानसिक तनाव, आर्थिक असमानता और देश की प्रगति पर भी असर डालती है। शिक्षा को कौशल आधारित बनाया जाए। सरकार व निजी कंपनियां रोजगार के अवसर बढ़ाएं। - गौरव बासफोर

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