कालचीनी: ढाई साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अलीपुरदुआर जिले का कालचीनी ब्लॉक का बंद दालसिंगपाड़ा चाय बागान में फिर से खुल गया है। शुक्रवार से बागान के खुलते ही बड़ी संख्या में श्रमिक अपने-अपने काम पर शामिल हुए हैं। लंबे समय से बंद पड़े बागान के खुलने से इलाके में एक बार फिर चहल-पहल लौट आई है। गौरतलब है कि वर्ष 2023 के अक्टूबर महीने में बोनस विवाद को लेकर दालसिंगपाड़ा चाय बागान बंद हो गया था। इसके बाद से ही सैकड़ों श्रमिकों और उनके परिवारों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा था। उसके बाद श्रमिकों को जो फौलाई भत्ता मिलता था, अचानक उसे भी बंद कर दिया गया। चाय बागान के तमाम श्रमिक और भी गंभीर संकट में फंसे हुए थे, इसको लेकर श्रमिकों के ओर से लगातार आंदोलन किया जा रहा था कभी रोड अवरोध , कभी प्रशासनिक कार्यालय घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था और बागान खोलने की मांग की जा रही थी। आखिरकार श्रमिकों के आंदोलन से प्रशासन ने पहल की और हाल ही में हुई त्रिपक्षीय बैठक के माध्यम से बागान खोलने की सहमति बनी। अब बागान खुलने की खबर से कई श्रमिकों में राहत की सांस दिखी। शुक्रवार को सुबह-सुबह मलिक पक्ष, पुलिस प्रशासन, ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधि और श्रमिकों की उपस्थिति में बागान को फिर से खोल दिया गया है। इस दौरान मिठाई खिलाकर श्रमिकों का मुंह मीठा कराया गया और श्रमिकों ने फिर से काम करना शुरू कर दिया है। चाय बागान के मैनेजर अजय सिंह ने बताया कि बागान लंबे समय तक बंद रहने के कारण उसकी देखभाल और पुनरुद्धार में काफी खर्च आ रहा है।
हाल ही में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि श्रमिकों के बकाया एरियर की राशि आगामी मार्च महीने में होली से पहले चुकाई जाएगी। वहीं बकाया बोनस की रकम दुर्गा पूजा से पहले देने का आश्वासन भी दिया गया है। वहीं इस विषय पर श्रमिक नेतृत्व का कहना है कि बागान लगातार खराब हो रहा था, इसलिए बागान को दोबारा खोलने की पहल की गई। उनका दावा है कि कुछ श्रमिक असंतुष्ट जरूर हैं, लेकिन सभी को काम पर लौटाने का प्रयास जारी है ताकि बागान फिर से पटरी पर आ सके। हालांकि बागान खुलने के बावजूद असंतोष की तस्वीर भी सामने आई है। कुछ श्रमिकों ने आरोप लगाया कि ट्रेड यूनियनों ने श्रमिकों को बैठक में शामिल किए बिना ही प्रबंधन से बातचीत कर बागान खुलवा दिया। बिना किसी बकाया भुगतान के बागान शुरू होने से वे नाराज हैं और इसे श्रमिक हितों की अनदेखी बता रहे हैं। दालसिंगपाड़ा चाय बागान के खुलने से जहां एक ओर उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों की नाराजगी आने वाले दिनों में नई चुनौती बन सकती है।