

अलीपुरदुआर के विकास को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कई बड़े ऐलान किए। परेड ग्राउंड में आयोजित जनसभा में उन्होंने कहा कि सरकार की नीति ‘बातें कम, काम ज्यादा’ की है। बक्सा और डुआर्स की प्राकृतिक संपदा को आधार बनाकर क्षेत्र को विश्वस्तरीय फॉरेस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने और दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना है। इसके साथ ही बंद चाय बागानों, टोटोपाड़ा, जयगांव और अलीपुरदुआर विश्वविद्यालय के विकास को लेकर भी उन्होंने सरकार की योजनाएं गिनाईं।
अधिकारी के संबोधन से पहले बक्सा टाइगर रिजर्व में लंबे इंतजार के बाद बाघिन की वापसी हुई। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई तीन वर्षीय बाघिन को बक्सा में छोड़ा गया। यह बक्सा में बाघों की आबादी फिर से बसाने की चरणबद्ध योजना का पहला कदम है। अधिकारी ने कहा कि अगले दो महीनों में तीन और बाघ बक्सा लाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाघों की वापसी के साथ डुआर्स में पर्यटन का नया अध्याय शुरू होगा। सरकार बक्सा समेत पूरे डुआर्स की प्राकृतिक खूबसूरती को दुनिया के सामने लाकर विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करना चाहती है। उन्होंने यह भी बताया कि जयंती और माणस नेशनल पार्क से सटे क्षेत्र में करीब 2,000 एकड़ जमीन पर विश्वस्तरीय फॉरेस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने का प्रस्ताव है।
चाय बागानों के मुद्दे पर अधिकारी ने कहा कि बंद बागानों को धीरे-धीरे खोलने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने चाय श्रमिकों के लिए केंद्र से 312 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत होने का दावा किया। जनजातीय समुदाय के लिए विशेष फूड पैकेट उपलब्ध कराने की बात भी कही।
टोटोपाड़ा को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 नवंबर को जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर वह वहां पहुंचेंगे। उन्होंने घर, शौचालय समेत बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की बात कही। जयगांव डेवलपमेंट बोर्ड और अलीपुरदुआर नगरपालिका के जरिए विकास कार्यों को गति देने के साथ अलीपुरदुआर विश्वविद्यालय के विस्तार पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर जंगल और प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी तथा बालू-पत्थर की लूट के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विकास और स्वच्छ प्रशासन के जरिए अलीपुरदुआर के लोगों का ‘ऋण’ चुकाने का प्रयास किया जाएगा।
बक्सा में बाघिन की वापसी के साथ वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को अलीपुरदुआर के विकास से जोड़ने की सरकार की योजना अब जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है। बाघ पुनर्वास कार्यक्रम में आवास सुधार, शिकार प्रजातियों की उपलब्धता और वन्यजीव कॉरिडोर को मजबूत करने जैसे पहलू भी शामिल हैं।