मां दुर्गा के गहनों में चमकता है दोयेल के हुनर का रंग

Doyel das de
Doyel das de
Published on: 

सिलीगुड़ी: दुर्गापूजा पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा का भव्य श्रृंगार हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचता है। मुकुट से लेकर कानों के झुमके, हार, चूड़ी और बिंदी तक, देवी के हर आभूषण के पीछे किसी न किसी कलाकार की महीन कारीगरी छिपी होती है। ऐसे ही एक कलाकार हैं सिलीगुड़ी के मध्य चयनपाड़ा की दोयेल दास दे। जो वर्षों से अपने हाथों से देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के लिए आभूषण तैयार कर रही हैं। दोयेल ने वर्ष 2003 में मूर्तिकार सुशांत पाल के मार्गदर्शन में इस काम की शुरुआत की थी। क्ले से आभूषण बनाने के अनुभव के साथ धीरे-धीरे उन्होंने प्रतिमाओं के श्रृंगार तैयार करने में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका कहना है कि फिलहाल सिलीगुड़ी में इस तरह का काम करने वाली महिलाओं में वह अकेली हैं। दुर्गा के अलावा दोयेल काली, मनसा, गणेश, विश्वकर्मा और शनिदेव की प्रतिमाओं के लिए भी आभूषण तैयार कर चुकी हैं। सिलीगुड़ी के उपकार क्लब, हैदरपाड़ा स्पोर्टिंग क्लब, सूर्यनगर फ्रेंड्स यूनियन सहित कई पूजा समितियों की प्रतिमाओं में उनके बनाए आभूषण सज चुके हैं। इस वर्ष चंपासारी के जातीय शक्ति संघ एवं पाठागार क्लब की प्रतिमा के श्रृंगार की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है। पूजा से करीब तीन महीने पहले ही दोयेल की व्यस्तता बढ़ जाती है। जरी, मोती, रंगता और मजबूत बोर्ड जैसी सामग्रियों से वह मुकुट, माला, चूड़ी, अंगूठी, कानों के झुमके और टिकली तैयार करती हैं। सिलीगुड़ी में जरूरी सामान उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें कोलकाता से भी सामग्री मंगानी पड़ती है। कई बार अंतिम समय में मिले ऑर्डर को पूरा करने के लिए उन्हें रात तक काम करना पड़ता है। घर-गृहस्थी संभालने के साथ इस कला को आगे बढ़ाने में उन्हें पति और सास का सहयोग मिलता है। दोयेल का सपना है कि आने वाले दिनों में वह और अधिक महिलाओं को इस कला का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करें।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in