सिक्किम में प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त

दवा कंपनियों और होटलों के कचरा प्रबंधन की होगी संयुक्त जांच
सिक्किम में प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त
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गंगटोक : सिक्किम में खेतों पर कचरे के जमाव और जलस्रोतों में बिना उपचारित अपशिष्ट जल छोड़े जाने की चिंताओं के बीच सिक्किम हाईकोर्ट ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को राज्यभर की दवा कंपनियों तथा अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों का संयुक्त निरीक्षण करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश ए. मुहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान की खंडपीठ ने बुधवार को कचरा एवं अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।

अदालत ने कहा कि निरीक्षण के दौरान अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की पर्याप्तता का आकलन किया जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि उद्योग, होटल और अन्य प्रतिष्ठान नदियों, झरनों तथा जलधाराओं में अपशिष्ट जल तो नहीं छोड़ रहे हैं।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह सत्यापित करने का भी निर्देश दिया गया है कि होटलों के पास संचालन के लिए अनिवार्य सहमति-पत्र है या नहीं और वे उसमें निर्धारित शर्तों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

अदालत ने इस मामले को सिंगताम में दवा कंपनियों द्वारा अपशिष्ट जल छोड़े जाने से संबंधित पहले निस्तारित जनहित याचिका, डब्ल्यूपी (पीआईएल) संख्या 12/2017, के साथ जोड़ दिया है। सुनवाई के दौरान मंगन के जिलाधिकारी अनंत जैन ने अदालत को बताया कि निरीक्षण किए जा चुके हैं और घरों के मालिकों तथा होटल संचालकों को नदियों और जलधाराओं में कचरा डालना बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अदालत को बताया कि आवश्यक संचालन सहमति के बिना चल रहे होटलों को मंजूरी प्राप्त करने के लिए 31 मार्च, 2027 तक का समय दिया गया है। इस पर खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा के बाद नियमों का पालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठानों को बंद करना होगा।

अदालत ने सिक्किम सीवरेज एवं मलजल निपटान अधिनियम, 2025 के तहत नियम अब तक तैयार नहीं किए जाने पर चिंता व्यक्त की। ये नियम जनवरी 2026 में अधिसूचित अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक हैं।

खंडपीठ ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। इस संबंध में अदालत ने भोपाल नगर निगम मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 19 फरवरी, 2026 को दिए गए निर्देश का भी उल्लेख किया।

जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के क्रियान्वयन पर सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि उल्लंघनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार के सचिव पर होने से प्रभावी प्रवर्तन में बाधा आ सकती है।

अदालत ने केंद्र सरकार को जिला जिलाधिकारियों को ऐसी कार्रवाई शुरू करने का अधिकार देने पर विचार करने का सुझाव दिया। साथ ही उप सॉलिसिटर जनरल को अदालत का आदेश केंद्र सरकार तक पहुंचाने को कहा।

खंडपीठ ने सिक्किम के दूरदराज के क्षेत्रों में अनियंत्रित होटल निर्माण और इससे राज्य की नाजुक पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर भी चिंता जताई।

अदालत ने राज्य सरकार को सिक्किम भवन निर्माण विनियमन, 1991 के दायरे को पूरे राज्य में विस्तारित करने पर विचार करने का सुझाव दिया। वर्तमान में यह विनियमन केवल गान्तोक में लागू है। अदालत ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई में इस प्रस्ताव पर राज्य सरकार का पक्ष प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर, 2026 को निर्धारित की गई है।

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