

नाथांग : पूर्वी सिक्किम के नाथांग में प्रथम सिक्किम हिमालयी याक महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव में याक के पारंपरिक आजीविका, सांस्कृतिक विरासत और उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान को प्रदर्शित किया गया।सिक्किम विधानसभा अध्यक्ष एम. एन. शेर्पा ने मुख्य अतिथि के रूप में महोत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर सामाजिक कल्याण मंत्री समदुप लेप्चा, कृषि मंत्री पुरण कुमार गुरुङ और स्थानीय विधायक पामिन लेप्चा भी उपस्थित रहे।सिक्किम सरकार के पशुपालन एवं पशुधन सेवा विभाग द्वारा आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य याक संरक्षण एवं कल्याण को बढ़ावा देना तथा याक पालकों के सामने आने वाली चुनौतियों के प्रति जागरूकता पैदा करना है।विभाग के सचिव डॉ. संदीप गुरुङ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का याक की आबादी पर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे याक पालकों को सहयोग देने के साथ-साथ इस आयोजन के माध्यम से दूरस्थ उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटन को भी प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। महोत्सव में सिक्किम और लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों के याक उत्पादों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल लगाए गए। इसके अलावा, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की जीवनशैली और पारंपरिक प्रथाओं को दर्शाने के लिए याक पालकों की पारंपरिक झोपड़ियां भी बनाई गईं।
हिमालयी याक सामान्यतः समुद्र तल से ३,००० से ५,००० मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। यह उच्च पर्वतीय समुदायों, विशेषकर डोकपा नाम से जाने जाने वाले पारंपरिक पशुपालकों के लिए दूध, मक्खन, पनीर, ऊन और परिवहन का महत्वपूर्ण साधन है।
हालांकि, बदलती जलवायु परिस्थितियों, चरागाहों में बदलाव और याक पालन के प्रति घटती रुचि के कारण यह पारंपरिक आजीविका चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में याक का संरक्षण और पशुपालक समुदायों की आजीविका को सहयोग देना महत्वपूर्ण हो गया है। महोत्सव में सिक्किम पशुधन विकास बोर्ड द्वारा विकसित सिरी गाय के मक्खन को भी प्रदर्शित किया गया। बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रतीक शर्मा ने इस उत्पाद की जानकारी दी।यह महोत्सव हिमालयी जैव विविधता के संरक्षण, पारंपरिक पशुपालन को प्रोत्साहन देने और उच्च पर्वतीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।