

गंगटोक : सिक्किम के साहित्य की अभिव्यक्ति, गुणवत्ता और स्तर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सिक्किम अकादमी ने ‘पांडुलिपि पुरस्कार 2026-27’ की घोषणा की है। इस प्रतियोगिता के तहत नेपाली, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में लिखी गई अप्रकाशित पांडुलिपियां आमंत्रित की गई हैं। चयनित उत्कृष्ट रचनाओं को नकद पुरस्कार प्रदान करने के साथ ही अकादमी उन्हें पुस्तक के रूप में प्रकाशित भी करेगी। अकादमी के अध्यक्ष प्रवीण राई जुमेली और महासचिव पूर्ण योञ्जन ने आज आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में प्रतियोगिता की जानकारी देते हुए बताया कि सिक्किमेली समाज के इतिहास, परंपरा, संस्कृति, कला, साहित्यिक आलोचना और निबंध सहित विभिन्न विषयों पर सूक्ष्म एवं गहन अध्ययन पर आधारित पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जाएगी। लेखक अपने पीएचडी शोधकार्य को प्रकाशन योग्य पुस्तक के रूप में पुनर्लेखन कर प्रतियोगिता में शामिल कर सकते हैं। हालांकि, पूरी तरह अकादमिक शैली में लिखे गए शोधग्रंथों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रतियोगिता में सिक्किम के निवासी और सिक्किम को अपना कर्मस्थल बनाकर रह रहे लेखक भाग ले सकते हैं। शिक्षक, शोधकर्ता, विद्यार्थी और अन्य पेशों से जुड़े व्यक्ति भी इसमें हिस्सा लेने के पात्र होंगे।
प्रतियोगिता में शामिल होने वाली पांडुलिपि पूरी तरह अप्रकाशित होनी चाहिए। इससे पहले प्रकाशन के लिए सिक्किम अकादमी में जमा की गई पांडुलिपियों को भी निर्धारित प्रवेश शुल्क दोबारा जमा करके प्रतियोगिता में शामिल किया जा सकता है।
अकादमी द्वारा नियुक्त पुस्तक चयन समिति पांडुलिपियों की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और विषयवस्तु की गहराई के आधार पर प्रथम एवं द्वितीय सर्वश्रेष्ठ रचनाओं का चयन करेगी। चयनित लेखकों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा और उनकी रचनाओं को पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। प्रकाशित पुस्तक की 100 प्रतियां संबंधित लेखक को उपलब्ध कराई जाएंगी। विवादास्पद लेखन को प्रतियोगिता में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रतियोगिता के लिए पांडुलिपि की न्यूनतम सीमा 200 पृष्ठ और अधिकतम सीमा 250 पृष्ठ निर्धारित की गई है। लेखकों को ए-4 आकार के कागज पर मुद्रित पांडुलिपि की कम से कम तीन बार प्रूफ रीडिंग करवाकर प्रवेश पत्र के साथ अकादमी के कार्यालय में जमा करना होगा। प्रतियोगिता के लिए प्रवेश शुल्क 1,000 रुपये निर्धारित किया गया है। पांडुलिपि जा करने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2027 निर्धारित की गई है। प्रतियोगिता में एक बार शामिल हो चुकी पांडुलिपियों को अगले वर्ष की प्रतियोगिता में दोबारा शामिल नहीं किया जा सकेगा। अकादमी ने यह भी स्पष्ट किया है कि चयनित पांडुलिपि यदि प्रकाशन के निर्धारित मानदंडों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो उसे पुस्तक के रूप में प्रकाशित नहीं किया जाएगा। अपनी अप्रकाशित पांडुलिपि वापस लेने के इच्छुक लेखक अकादमी के कार्यालय में उपस्थित होकर उसे वापस ले सकते हैं। इस पहल से सिक्किम के समाज, संस्कृति और इतिहास पर आधारित गंभीर अध्ययन तथा रचनात्मक लेखन को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही क्षेत्रीय साहित्य के विकास और विस्तार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।