आस लगाए बैठे है दार्जिलिंग मोड़ अग्निकांड में बर्बाद हुए दुकानदार

फाइल फोटो - आगलगी में तबाह हुए दुकानें
फाइल फोटो - आगलगी में तबाह हुए दुकानें
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सिलीगुड़ी: दार्जिलिंग मोड़ अग्निकांड में तबाह हुए दुकानदार प्रशासन से सहयोग की उम्मीद लगाए बैठे हैं | लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की मदद उन्हें नहीं मिली है | बता दे कि बीते 26 अक्टूबर की रात एक ओर तो जहां पूरा शहर छठ पूजा की तैयारी में जुटा हुआ था | उस दिन छठ व्रतियां अपने घर पर खरना कर छठ मैया की पूजा कर रही थी तो दूसरी ओर दार्जिलिंग मोड़ स्थित फर्नीचर की दुकानों में आगलगी की घटना घटित हुई | देखा जाए तो दार्जिलिंग मोड़ एक ऐसा इलाका है जहां पर हमेशा लोगों की चहल-पहल बनी रहती है और त्यौहार के समय तो देर रात यहां रौनक बनी रहती है | 26 अक्टूबर रात के लगभग 10 बजे के बाद फर्नीचर दुकानों में अचानक आग लग गई | चारों तरफ अफरातफरी का माहौल बन गया और घटनास्थल पर जो लोग मौजूद थे उन्होंने आग पर काबू पाने का प्रयास किया | लेकिन आग की लपटें इतनी भयावह थी कि, उसमें छह दुकानें जलकर राख हो गई |

सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची, काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया | वहीं लोगों का आरोप है कि दमकल के गाड़ियों ने आने में थोड़ी देर कर दी, यदि कुछ देर और होती तो वहां जितने भी दुकानें है सब आग में स्वाहा हो जाती | छह दुकानों के लगभग 30 से 35 लाख के समान जलकर खाक हो गए | घटना की दूसरे दिन नगर निगम के मेयर , व्यवसायी समिति के अध्यक्ष और अन्य लोगों ने घटनास्थल का दौरा किया | वहीं सहयोग का आश्वासन भी दिया | आग लगी की चपेट में आने वाले दुकानदारों ने मुआवजे की मांग भी की थी | सूत्रों से जानकारी मिली है कि मेयर गौतम देब ने मुआवजे का आश्वासन भी दिया था | इस अग्निकांड को लेकर दुकानदारों को आशंका है कि यहां पर किसी बड़ी साजिश को अंजाम दिया गया था | उनका कहना है कि, साजिशकर्ता यहां जितने भी दुकानें हैं सबको बर्बाद कर देना चाहते थे | लेकिन सिर्फ छह दुकानें ही इस आग की चपेट में आए |

दुकानदारों ने सिलीगुड़ी कमिश्नरेट कार्यालय में जांच की मांग भी की थी और उन्होंने जांच का आश्वासन भी दिया था | लेकिन अब तक इस मामले में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है और इसे दुकानदार निराशा है | स्थानीय लोगों द्वारा जानकारी मिली है कि अग्निकांड में बर्बाद हुए दुकानदारों की हालत खराब हो चुकी है क्योंकि उनकी जितनी भी संपत्तियां थी वह सब जलकर खाक हो चुकी है | उनको दोबारा व्यापार करने में कई तरह की कठिनाइयों का सामना पड़ रहा है | वहीं दूसरी ओर दुकानदार भी सरकार से छानबीन और सहयोग की आस में दिन गुजर रहे हैं दुकानदारों का कहना है कि यदि नगर निगम से उन्हें कुछ सहयोग मिल जाता तो वे अपने व्यापार को फिर से शुरू कर पाते |

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