

गंगटोक : सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने सिक्किम और दार्जिलिंग के विलय को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच राज्य सरकार से विधानसभा में अपना रुख स्पष्ट करने और राज्य की संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
एसडीएफ की प्रवक्ता योजना खालिंग राई ने गुरुवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सिक्किम की जनता को राजनीतिक प्रचार, भ्रम और आश्वासनों के बजाय ठोस कानूनी सुरक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व वाली एसकेएम सरकार से इस मुद्दे पर मौखिक प्रतिक्रियाओं तक सीमित न रहकर विधानसभा में स्पष्ट प्रस्ताव लाने का आग्रह किया।
राई ने वर्ष 2011 में तत्कालीन एसडीएफ सरकार द्वारा विधानसभा में गोरखालैंड राज्य की मांग के समर्थन में प्रस्ताव पारित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार को भी जनता द्वारा दिए गए जनादेश का उपयोग सिक्किम के हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य के राजनीतिक दलों को इस संवेदनशील मुद्दे पर केवल राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय जिम्मेदार राजनीतिक आचरण अपनाना चाहिए। उनके अनुसार, जनता ने अपने प्रतिनिधियों को विधानसभा में राज्य के हितों की रक्षा के लिए जनादेश दिया है और उसका उपयोग ठोस कदम उठाने में होना चाहिए।
एसडीएफ प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार प्रोफेसर महेंद्र पी. लामा की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लामा के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग से आगे बढ़कर राज्य सरकार को सिक्किम की सुरक्षा के लिए वैधानिक पहल करनी चाहिए।
राई ने कहा कि केवल किसी अधिकारी को पद से हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सरकार को विधानसभा में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार विधानसभा में सिक्किम और दार्जिलिंग के विलय के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करती है, तो इससे जनता के बीच सरकार के रुख को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
एसडीएफ ने दोहराया कि वह दार्जिलिंग पहाड़ के लोगों की अलग गोरखालैंड राज्य की मांग का समर्थन करता है और सिक्किम के विलय के बजाय गोरखालैंड राज्य के गठन का पक्षधर है। पार्टी ने राज्य सरकार से जनता की आशंकाओं को दूर करने और सिक्किम के हितों की रक्षा के लिए विधानसभा के माध्यम से स्पष्ट वैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।