NBMCH में अब तक शुरू नहीं हुआ रूमेटोलॉजी विभाग

गठिया और जोड़ों के दर्द से परेशान मरीज मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक और सर्जरी विभाग के बीच भटकने को मजबूर - अस्पताल की फार्मेसी में रूमेटोलॉजी की जरूरी दवाइयों की भी कमी, सप्ताह में दो दिन मेडिसिन ओपीडी में ही देखे जा रहे रूमेटोलॉजी के मरीज
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सिलीगुड़ी : स्वास्थ्य विभाग की ओर से काफी पहले ही उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में रूमेटोलॉजी (गठिया रोग) विभाग शुरू करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन अब तक यह विभाग पूरी तरह शुरू नहीं हो सका है। इसके कारण गठिया और जोड़ों के दर्द से परेशान मरीजों को काफी परेशानी और निराशा का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की फार्मेसी में इस बीमारी के इलाज के लिए जरूरी दवाइयों की भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं है। बड़ी संख्या में मरीज जोड़ों और शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचते हैं।

लेकिन अलग रूमेटोलॉजी विभाग नहीं होने के कारण कई मरीज यह तय नहीं कर पाते कि उन्हें किस विभाग में जाना चाहिए। कोई मेडिसिन विभाग पहुंचता है, तो कोई ऑर्थोपेडिक या सर्जरी विभाग में चला जाता है। रूमेटोलॉजी विभाग का उद्देश्य विभिन्न प्रकार के दर्द और गठिया से जुड़ी बीमारियों के सही कारण की पहचान कर उनका उचित इलाज करना है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में अलग रूमेटोलॉजी विभाग शुरू करने का निर्देश पहले ही दिया जा चुका है। अस्पताल में इस विभाग के डॉक्टर भी मौजूद हैं। फिलहाल मेडिसिन विभाग के अधीन रूमेटोलॉजी के एक सहायक प्रोफेसर मरीजों को देखते हैं। वह सप्ताह में मंगलवार और बुधवार को मेडिसिन ओपीडी में मरीजों का इलाज करते हैं।

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय के लिए सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में रूमेटोलॉजी की अलग ओपीडी शुरू की गई थी और वहां एक डॉक्टर मरीजों को देखते थे। बाद में अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक के निर्देश पर इस ओपीडी को बंद कर फिर से मेडिसिन विभाग के अधीन कर दिया गया। हालांकि, अलग रूमेटोलॉजी ओपीडी को बंद करने का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। वर्तमान अधीक्षक डॉ. कौशिक ईश्वर ने कहा कि अलग रूमेटोलॉजी विभाग शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग का निर्देश है।

हालांकि, पूर्ण रूप से विभाग शुरू करने में अभी कुछ और समय लगेगा। पानीघाटा निवासी अमल छेत्री कई वर्षों से कमर और विभिन्न जोड़ों के दर्द से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि पहले मेडिसिन विभाग में आया था। डॉक्टर ने दवा दी थी। लेकिन दर्द कम नहीं हुआ, इसलिए 15 दिन बाद दोबारा आया हूं। अलग रूमेटोलॉजी विभाग और जरूरी दवाइयों की उपलब्धता जल्द सुनिश्चित होने पर ऐसे मरीजों को बेहतर और अधिक व्यवस्थित उपचार मिलने की उम्मीद है।

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