NBMCH में फिर सवालों के घेरे में निगरानी व्यवस्था

वार्ड से 76 वर्षीय मरीज लापता, सुरक्षा एजेंसी को कारण बताओ नोटिस
North bengal medical college and hospital
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सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाजरत 76 वर्षीय मरीज के लापता होने की घटना से अस्पताल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर फिर सवाल उठने लगे हैं। मेल मेडिसिन-2 वार्ड में भर्ती जलपाईगुड़ी सदर ब्लॉक के टूटापाकड़ी निवासी नीरन बरुआ शनिवार तड़के वार्ड से निकल गए। इसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिला है। घटना को लेकर परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। जानकारी के अनुसार, नीरन बरुआ को शुक्रवार को अस्पताल के मेल मेडिसिन-2 वार्ड में भर्ती कराया गया था। रात में उनकी पत्नी भी उनके साथ थीं।शनिवार तड़के पत्नी शौचालय गईं। वापस लौटने पर उन्होंने देखा कि नीरन अपने बिस्तर पर नहीं हैं। उन्होंने वार्ड में मौजूद नर्स और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की, लेकिन मरीज का पता नहीं चल सका। इसके बाद नीरन के बेटे विकास बरुआ अस्पताल पहुंचे और पूरे परिसर में उनकी तलाश की। काफी खोजबीन के बाद भी जब कोई जानकारी नहीं मिली तो परिवार की ओर से अस्पताल के अधीक्षक और मेडिकल चौकी में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले में अपहरण की शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

परिवार का आरोप है कि वार्ड में डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी मौजूद रहते हैं। वहीं, वार्ड के बाहर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी रहती है। इसके बावजूद एक बुजुर्ग मरीज आखिरकार वार्ड से बाहर कैसे निकल गया, यह बड़ा सवाल है। बेटे विकास के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में उनके पिता को वार्ड से सभी के सामने निकलते हुए देखा जा रहा है, लेकिन किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की। परिवार का यह भी आरोप है कि उन्होंने अस्पताल के बाहरी हिस्से का सीसीटीवी फुटेज देखने की मांग की थी, ताकि पता लगाया जा सके कि मरीज अस्पताल से निकलने के बाद किस दिशा में गए। हालांकि, उन्हें वह फुटेज नहीं दिखाया गया।

मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. कौशिक ईश्वर ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद सुरक्षा कर्मियों की एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही मरीज वार्ड से बाहर कैसे निकल गए, इसकी जांच के लिए अस्पताल स्तर पर आंतरिक जांच भी शुरू की गई है। पुलिस भी पूरे मामले की जांच कर रही है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मरीजों के लापता होने की घटनाएं पहले की तुलना में कम हुई हैं। पहले जहां महीने में औसतन 18-20 मरीजों के लापता होने की शिकायत सामने आती थी, वहीं पिछले तीन महीनों में मेडिकल कॉलेज से औसतन करीब सात मरीजों के लापता होने की सूचना मिली है। इनमें से कुछ मरीज बाद में अपने घर पर मिले। बताया गया कि वे अस्पताल से छुट्टी लिए बिना ही घर चले गए थे।

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