जलपाईगुड़ी में शुरू हुई फिजिक्स बैलिस्टिक लैब

आरएफएसएल भवन के बगल के कमरे में शुरू हुई बैलिस्टिक लैब
आरएफएसएल भवन के बगल के कमरे में शुरू हुई बैलिस्टिक लैब
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जलपाईगुड़ी: उत्तर बंगाल के आठ जिलों में होने वाली गोलीबारी की घटनाओं की वैज्ञानिक जांच अब जलपाईगुड़ी में ही संभव होगी। जलपाईगुड़ी शहर के रेसकोर्सपाड़ा स्थित रीजनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (आरएफएसएल) में फिजिक्स बैलिस्टिक लैब शुरू की गई है। इसके बाद गोलीकांड से जुड़े मामलों में पुलिस को जांच के लिए नमूने कोलकाता स्थित राज्य फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी। नई सुविधा के जरिए यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किसी घटना में पिस्तौल, राइफल, देशी रिवॉल्वर या किसी अन्य हथियार से गोली चलाई गई थी। फिलहाल उत्तर बंगाल के आठ जिलों की पुलिस इस सुविधा का लाभ उठा सकेगी। जलपाईगुड़ी की क्षेत्रीय फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में पहले से बायोलॉजी, केमिस्ट्री, सेरोलॉजी और टॉक्सिकोलॉजी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब फिजिक्स बैलिस्टिक लैब को भी इसमें शामिल किया गया है।

कारतूस और हथियारों की होगी जांच

लैब सूत्रों के अनुसार, इस्तेमाल किए गए कारतूस के खोखे और पुलिस द्वारा जब्त हथियारों की जांच के आधार पर यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि गोली किस हथियार से चलाई गई थी। इसके अलावा वाहन के शीशे, घर के दरवाजे-खिड़की, दुकान के शटर या अन्य वस्तुओं में मिले छेद की वैज्ञानिक जांच कर यह भी पता लगाया जा सकेगा कि वहां गोली चली थी या नुकसान किसी अन्य कारण से हुआ। आरएफएसएल की सहायक निदेशक डॉ. मौसुमी रक्षित ने बताया कि जुलाई के अंत में लैब के एक एक्सटेंशन रूम में फिजिक्स बैलिस्टिक सुविधा शुरू की गई है। फिलहाल हथियार और गोली से संबंधित प्राथमिक जांच शुरू हो चुकी है। उन्होंने बताया कि फिजिक्स से जुड़े कुछ और उपकरण आने के बाद गोली लगने के मामलों की जांच और अधिक विस्तृत रूप से की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल फोरेंसिक विशेषज्ञ इस्लामपुर में हाल में हुई गोलीबारी की घटना से जुड़े नमूनों की जांच में भी जुटे हैं। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में आवश्यक उपकरण उपलब्ध होने के बाद बैलिस्टिक जांच की पूरी सुविधा जलपाईगुड़ी में ही मिल सकेगी।

क्राइम सीन सुरक्षित रखना जरूरी

फोरेंसिक विशेषज्ञों ने पुलिस को सलाह दी है कि किसी गोलीकांड की जांच शुरू करने से पहले घटनास्थल को सुरक्षित रखा जाए और सभी जरूरी नमूने वैज्ञानिक तरीके से एकत्र किए जाएं। नमूने नष्ट या दूषित होने पर जांच और अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत करने में कठिनाई हो सकती है। कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर और मालदह समेत विभिन्न जिलों में समय-समय पर गोलीबारी की घटनाएं सामने आती रही हैं। पिछले एक-दो वर्षों में राजनीतिक संघर्ष से जुड़ी गोलीबारी की घटनाएं अपेक्षाकृत कम रही हैं, लेकिन डकैती और छिनतई की कई घटनाओं में हथियारों के इस्तेमाल के मामले सामने आए हैं। उत्तर बंगाल पुलिस के एक जिला अधिकारी ने फिजिक्स बैलिस्टिक लैब शुरू होने को महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि पहले नमूनों को जांच के लिए कोलकाता भेजना पड़ता था, जिसमें समय और खर्च दोनों अधिक होते थे। साथ ही, अदालत में गोलीकांड से जुड़े मामलों को साबित करने के लिए वैज्ञानिक रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण होती है। डॉ. मौसुमी रक्षित ने बताया कि पुलिस द्वारा जब्त हथियार और इस्तेमाल किए गए कारतूस के खोखे सहित विभिन्न नमूनों की जांच के आधार पर यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि गोली किस बंदूक, पिस्तौल या रिवॉल्वर से चली थी। उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल के आठ जिलों से आने वाले गोलीकांड के मामलों की वैज्ञानिक जांच के लिए लैब तैयार है।

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