सिलीगुड़ी की ‘जीवन रेखा’ महानंदा नदी किनारे सुकून तलाशते लोग

शाम होते ही चलने वाली शीतल हवाएं लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही
रात के समय महानंदा नदी के किनारे बैठे लोग
रात के समय महानंदा नदी के किनारे बैठे लोग
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सिलीगुड़ी: महानंदा नदी को यूं ही सिलीगुड़ी की ‘जीवन रेखा’ नहीं कहा जाता। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच जब लोगों को कुछ सुकून के पल मिलते हैं, तो वे अक्सर महानंदा नदी के किनारे समय बिताने पहुंचते हैं।

पिछले कुछ दिनों से सिलीगुड़ी का मौसम भी काफी सुहाना बना हुआ है। शाम होते ही चलने वाली शीतल हवाएं लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। ऐसे खुशनुमा मौसम का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग अपने दोस्तों और परिजनों के साथ महानंदा नदी के किनारे पहुंच रहे हैं।

यहां का नजारा भी बेहद दिलकश नजर आता है। कुछ युवा गिटार लेकर बैठते हैं और गीतों का अभ्यास करते दिखाई देते हैं, तो कुछ लोग परिवार और दोस्तों के साथ चाय की चुस्कियों का आनंद लेते नजर आते हैं। जैसे-जैसे शाम ढलती है, नदी किनारे लोगों की भीड़ भी बढ़ने लगती है।

वहीं, कुछ बुजुर्ग अपनी टोली के साथ बैठकर बीते दिनों की यादें ताजा करते हैं, तो कुछ लोग हंसी-मजाक और ठिठोली में वक्त बिताते नजर आते हैं। महानंदा नदी का किनारा इन दिनों लोगों के लिए महज एक जगह नहीं, बल्कि सुकून और अपनों के साथ समय बिताने का एक खूबसूरत ठिकाना बन गया है।

हालांकि, लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन की भी कड़ी निगरानी रहती है। शाम होते ही इलाके में पुलिस गश्त शुरू हो जाती है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिसकर्मी लगातार चौकसी बरतते हैं।

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