

सिलीगुड़ी : देश की प्रीमियम ट्रेनों में शामिल वंदे भारत स्लीपर ट्रेन एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह रफ्तार या सुविधा नहीं, बल्कि खाने का मेन्यू है। पश्चिम बंगाल और असम को जोड़ने वाली इस सेमी-हाईस्पीड ट्रेन में यात्रियों को अब केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जाएगा। आईआरसीटीसी के इस फैसले से खासकर बंगाल और असम के यात्रियों में नाराजगी देखी जा रही है। छुट्टियों में परिवार के साथ कोलकाता जाने की तैयारी कर रहे सूर्यनगर निवासी केंद्रीय सरकारी कर्मचारी संजीव दत्त टिकट बुक करते समय उस वक्त हैरान रह गए, जब उन्होंने ट्रेन का फूड मेन्यू देखा। मेन्यू में न तो चिकन था, न मटन और न ही बांग्लियों की पसंदीदा मछली। पूरा मेन्यू शुद्ध शाकाहारी व्यंजनों से भरा हुआ था।
संजीव दत्त का कहना है कि देश के कई हिस्सों में ट्रेन से सफर किया है, लेकिन ऐसा अजीब मेन्यू कभी नहीं देखा। त्योहार के समय भी अगर सिर्फ शाकाहारी खाना ही मिले, तो यह हैरानी की बात है।
बंगाल और असम दोनों ही राज्यों में मछली और मांस भोजन का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन दो राज्यों को जोड़ने वाली पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में नॉनवेज भोजन को पूरी तरह बाहर क्यों रखा गजा।
इस मुद्दे पर आईआरसीटीसी के एक अधिकारी ने कहा कि सर्वे के अनुसार रात की यात्रा करने वाले अधिकतर यात्री शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं। इसके अलावा शाकाहारी भोजन जल्दी पचता है, इसलिए यात्रियों की सेहत को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। अधिकारी ने यह भी कहा कि भोजन भले ही शाकाहारी हो, लेकिन वह नामी पांच-सितारा होटलों से आएगा।
ट्रेन के मेन्यू के मुताबिक, हावड़ा से कामाख्या जाने वाली ट्रेन में बसंती पुलाव, चना या मूंग दाल, आलू भुजिया, छेना या ढोकर दालना, संदेश और रसगुल्ला परोसा जाएगा। वहीं वापसी में कामाख्या से हावड़ा की यात्रा के दौरान असम का जोहा चावल, माटी माहुर दाल, मसूर दाल, मौसमी सब्ज़ी और नारियल की बर्फी दी जाएगी। दोनों दिशाओं में चाय और कॉफी उपलब्ध होगी।
सोशल मीडिया पर भी मेन्यू को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि बसंती पुलाव के साथ मूंग या चना दाल कौन खाता है? वहीं कुछ का कहना है कि मेन्यू तय करने वालों को स्वाद की समझ नहीं है।
कुल मिलाकर, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का यह शुद्ध शाकाहारी मेन्यू अब भोजन प्रेमी यात्रियों के लिए नई परेशानी बन गया है। सवाल यही है कि आधुनिक और प्रीमियम ट्रेन में सफर करते हुए क्या यात्रियों की खान-पान की पसंद को नजरअंदाज किया जाना सही है।