नाइट कल्चर, शराब और शबाब समाज के लिए बना दीमक

फाइल फोटो, पब में पार्टी करते युवा
फाइल फोटो, पब में पार्टी करते युवा
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 सिलीगुड़ी: इन दिनों सिलीगुड़ी में नाइट कल्चर का चलन काफी बढ़ गया, जो धीरे धीरे समाज को दीमक की तरह बर्बाद कर रहा है | कुछ लोगों के लिए यह धन उगाही का जरिया है लेकिन यह हर उम्र के लोगों को अपना गुलाम बना रही है | रात में देर तक पब, बार का खुले रहना वहां नाच गाना जाम से जाम टकराना अब फैशन में शुमार हो गया है | रात्रि के समय सड़कों पर जिस तरह की घटनाएं घटित हो रही है जो इसका जीता जगता प्रमाण है | बढ़ते हिड एंड रन के मामले और नाइट कल्चर में प्रशासन की उदासीनता भी अब शहर वासियों को खलने लगी है | इस विषय में कुछ प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है:

डिस्को, बार,पब ये सब अच्छी नहीं हैं। नाइट कल्चर अब फैशन बन गया है, इसमें कुछ बदलाव और कड़े नियम लागु करने चाहिए । इसका बुरा असर युवाओं पर पड़ता ही है और शादीशुदा ज़िंदगी भी प्रभावित होती है | आपसी रिश्ते इतने बिगड़ जाते है बात तलाक तक पहुंच जाती है। नशे में सड़क दुर्घटना के मामले भी ज्यादा घटित होते है | ऐसे में समाज और पुलिस प्रशासन दोनों को मिल कर काम करना होगा : बिंदु दहाल समाजसेवी

कुछ सालों में बढ़ते डांस बार संस्कृति ने न केवल हमारे सांस्कृतिक का पतन किया है, बल्कि आर्थिक रूप से भी हम काफी कमजोर हुए है , और जब से युवा पीढ़ी पर पब कल्चर का नशा हावी हुआ है शराब और शबाब के साथ साथ ड्रग्स भी जुड़ता चला गया, और उत्तर बंगाल आज सबसे बड़ा ड्रग्स का खपत केंद्र बन चुका है, ऐसे में समाज के जिम्मेदार नागरिकों को चिंतन के साथ सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए : पवन मिरानिया व्यापारी

नाइट कल्चर ने समाज को बर्बाद कर दिया है | पब, बार, डिस्को से जिस हालत में महिला, पुरुष व युवा पीढ़ी बाहर निकलती है उसे देखकर ही शर्मा आ जाती है | सरकार इसमें कुछ नहीं करेगी क्योंकि इसमें उसका भी फायदा है | ऐसे में एक अभिभावक और समाज को ही आगे आना होगा और समझाना होगा कि क्या सही है और क्या गलत | बच्चों के साथ खुद को भी अपनी संस्कृति से जुड़े रखना जरूरी है: मनोज कुमार तेतरवाल समाजसेवी

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अब लोगों की भीड़ कम होने लगी है, वहीं दारू पार्टी, पब, डिस्को में हर उम्र के लोग जाने लगे हैं | पश्चिमी कल्चर ने समाज को जकड़ लिया है, सिर्फ युवा ही नहीं हर उम्र के लोग भ्रमित हो चुके है | हमारा अस्तित्व संस्कृति से जुड़ा है और इसे बचाना हर नागरिक की पहली प्राथमिकता है | सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नाइट कल्चर के बारे में जागरूक करने की पहल की जानी चाहिए: महेश कुमार नकीपुरिया दारा समाजसेवी

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