अलीपुरदुआर: डुआर्स की प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यटन को पूरे साल सक्रिय बनाए रखने के लिए नई पहल शुरू की गई है। मानसून के दौरान जंगल बंद होने से प्रभावित होने वाले पर्यटन कारोबार को संभालने के लिए ईस्टर्न डुआर्स टूरिज्म डेवलपमेंट एसोसिएशन ने वैकल्पिक पर्यटन मॉडल तैयार करने की योजना बनाई है। अलीपुरदुआर जिले के मादारीहाट में आयोजित एसोसिएशन की महत्वपूर्ण बैठक में बरसात के मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करने के विभिन्न उपायों पर चर्चा की गई। गौरतलब है कि हर वर्ष मानसून के तीन महीनों में चिलापाता, बक्सा और जलदापाड़ा जैसे प्रमुख वन क्षेत्रों में पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी जाती है। इसके कारण होटल, होम-स्टे संचालक, गाइड, वाहन चालक और स्थानीय व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। एसोसिएशन के प्रतिनिधि विश्वजीत साहा ने बताया कि जंगल सफारी बंद रहने के दौरान डुआर्स की प्राकृतिक सुंदरता, ग्रामीण जीवन, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को पर्यटन का नया आकर्षण बनाने पर विचार किया जा रहा है।
जनजातीय संस्कृति, लोककला, नृत्य, संगीत और पारंपरिक खान-पान बनेगा पर्यटन का नया आकर्षण
बैठक में डुआर्स के विभिन्न जनजातीय समुदायों की समृद्ध संस्कृति, लोककला, पारंपरिक नृत्य, संगीत, खान-पान और जीवनशैली को पर्यटन से जोड़ने की योजना पर भी चर्चा हुई। इससे पर्यटकों को डुआर्स की अलग पहचान देखने का मौका मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। एसोसिएशन का मानना है कि मानसून पर्यटन को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए तो डुआर्स को पूरे वर्ष पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है। संगठन जल्द ही विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। बरसात के तीन महीनों को पर्यटन के लिए कमजोर समय मानने के बजाय, उसे सांस्कृतिक और ग्रामीण पर्यटन के अवसर में बदलने की यह पहल डुआर्स के पर्यटन उद्योग के लिए नई उम्मीद के रूप में देखी जा रही है।