लुकसान में ऐतिहासिक स्थल का नामकरण ‘लुकसान एकता चौक’

एकता समाज के ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने की पहल
समारोह के दौरान गणमान्य लोग
समारोह के दौरान गणमान्य लोग
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नागराकाटा: कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर डुआर्स के लुकसान में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल का नामकरण ‘लुकसान एकता चौक’ के रूप में किया गया। नामकरण कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन लुकसान क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी एवं डुआर्स के लोकगायक बाबुलाल सुब्बा ने नारियल फोड़कर किया। कार्यक्रम में समाजसेवी विष्णुलाल सुब्बा, शिक्षक नारायण पौड्याल, दिलीप लेप्चा, मकुन्द छेत्री, तिलामाया छेत्री, तिलक ढुंगाना, कृष्ण छेत्री, नन्दराज शर्मा और लालध्वज लिम्बू सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित हुए । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षक एवं एकता समाज के सक्रिय कार्यकर्ता नारायण छेत्री ने ‘एकता चौक’ नामकरण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 के दशक में नेपाली समाज को संगठित करने के उद्देश्य से वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षक जनार्दन थापा के नेतृत्व में अखिल भारतीय नेपाली एकता समाज का गठन किया गया था। इस सामाजिक अभियान की शुरुआत लुकसान क्षेत्र से ही हुई थी। इसी ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से स्थल का नाम ‘लुकसान एकता चौक’ रखा गया है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन वाम शासन के दौरान नेपालीभाषी समुदाय के अधिकारों तथा भाषा-संस्कृति के संरक्षण को लेकर एकता समाज ने आवाज उठाई थी। डुआर्स से तराई तक नेपाली भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक अभियान चलाए गए। नेपाली माध्यम के विद्यालयों को सरकारी मान्यता, विद्यालय एवं कॉलेजों के संचालन तथा पुस्तकालयों की स्थापना जैसी मांगें भी उस दौर में प्रमुखता से उठाई गई थीं। शिक्षक नारायण पौड्याल ने एकता समाज के आंदोलन के दौरान कार्यकर्ताओं द्वारा झेली गई कठिनाइयों और संघर्षों को याद किया। उन्होंने बताया कि उस समय कुछ कार्यकर्ताओं पर विभिन्न आरोपों के तहत मामले दर्ज किए गए थे और कई लोगों को अपना घर छोड़कर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके बाद उन्हें लंबे समय तक अदालत में कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

आयोजकों के अनुसार, करीब 36 वर्ष बाद लुकसान क्षेत्र की नई पीढ़ी को एकता समाज के इस ऐतिहासिक योगदान और संघर्ष की जानकारी मिली। इसके बाद युवाओं ने अपने अग्रजों के सामाजिक योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से इस स्थल का नाम ‘लुकसान एकता चौक’ रखने का निर्णय लिया।

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