

गंगटोक : सिक्किम उच्च न्यायालय ने मंगन के जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रज्वल खतिवड़ा को उनके विरुद्ध चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही के बीच निलंबित कर दिया है। उच्च न्यायालय की मंजूरी के बाद 4 नवंबर को जारी आदेश के तहत उनका निलंबन तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। निलंबन से कुछ सप्ताह पहले खतिवड़ा ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख करते हुए आरोप लगाया था कि तत्कालीन कार्यरत उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।उनके विरुद्ध चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही में कुल 33 आरोप शामिल हैं। ये आरोप उच्च न्यायालय में रजिस्ट्रार जनरल के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान पदोन्नति, सेवा उन्नयन और नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं से संबंधित हैं। इन अनियमितताओं के कारण सरकारी खजाने को लगभग 1.64 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कही गई है।
बताया गया है कि पूर्ण न्यायालय (फुल कोर्ट) ने उन्हें जारी किए गए दो कारण बताओ नोटिसों के जवाबों को संतोषजनक नहीं पाया। हालांकि, खतिवड़ा ने अपने विरुद्ध लगाए गए सभी 33 आरोपों से इनकार किया है। उनका तर्क है कि संबंधित निर्णय मुख्य न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र में लिए गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि अपने बचाव के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण दस्तावेज उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए।
इस बीच, सिक्किम उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कमी के कारण न्यायिक कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। न्यायालय में स्वीकृत तीन न्यायाधीशों के पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल दो न्यायाधीश कार्यरत हैं। इसके परिणामस्वरूप पांच रिट अपीलें न्यायाधीशों की कमी के कारण सुनवाई और निर्णय की प्रतीक्षा में लंबित हैं।