मानव बनाम बाइसन, साहस दिखाकर बचे राभा बस्ती के अनिल

बाइसन क हमले से घायल अनिल इलाजरत
बाइसन क हमले से घायल अनिल इलाजरत
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कालचीनी : डुआर्स में एक बार फिर बेकाबू वन्यजीवों के हमलों से लोग दहशत में है। संरक्षित जंगल से सटे इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ताजा मामला अलीपुरदुआर जिले के जलदापाड़ा जंगल से सटे मेदाबाड़ी राभा बस्ती का है, जहां एक भयानक बाइसन से आमने-सामने की मुठभेड़ में एक व्यक्ति मौत के मुंह से लौट आया। साहस और सूझबूझ की मिसाल पेश करते हुए व्यक्ति ने बाइसन से संघर्ष किया, जिसके बाद बाइसन पीछे हटकर जंगल की ओर भाग गया। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, राभा बस्ती के निवासी अनिल राभा शुक्रवार को अपने घर के पास बहती नदी में मछली पकड़ने जा रहे थे। तभी अचानक जंगल से निकलकर एक आक्रामक बाइसन ने उन पर हमला कर दिया। बाइसन के जोरदार धक्के से अनिल जमीन पर गिर पड़े। पलभर में हालात की गंभीरता समझते हुए उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने पास मौजूद औजार से आत्मरक्षा की कोशिश शुरू कर दी। इसके बाद अनिल और बाइसन के बीच जानलेवा संघर्ष चलता रहा, संघर्ष के दौरान बाइसन ने कई बार अनिल पर हमला किया, लेकिन अनिल ने पूरी ताकत और साहस के साथ मुकाबला किया। आखिरकार स्थिति बिगड़ती देख बाइसन अनिल को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। हालांकि, इस संघर्ष में अनिल गंभीर रूप से घायल हो गए। बायसन द्वारा सिंह से किए गए प्रहार से उसके पैर और हाथ में गहरी चोट आई है।

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायल अनिल को उद्धार कर कालचीनी के उत्तर लताबाड़ी ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार, अनिल की हालत चिंताजनक बनी हुई है और उनका इलाज जारी है। घटना के बाद अनिल राभा ने बताया, “मैं घर के सामने ही नदी में मछली पकड़ने जा रहा था। अचानक बाइसन ने हमला कर दिया। अगर मैं मुकाबला नहीं करता तो शायद जिंदा न होता।” उनके इस साहसिक बयान ने पूरे इलाके में उनकी बहादुरी की चर्चा तेज कर दी है। इस घटना के बाद मेदाबाड़ी और आसपास के चाय बागान इलाकों में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में अक्सर हाथी, बाइसन जैसे वन्यजीव घुस आते हैं, जिससे आम लोगों की जान-माल को गंभीर खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यदि जंगल और गांवों की सीमाओं पर मजबूत फेंसिंग होती, तो इस तरह की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता था।

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