तेंदुए ने महिला श्रमिक पर किया हमला

अस्पताल से घायल महिला को ले जाते परिवार वाले
अस्पताल से घायल महिला को ले जाते परिवार वाले
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कालचीनी: डुआर्स के हरे-भरे चाय बागान हमेशा से ही अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में चाय बागानों में इंसान और वन्य जीवों के बीच टकराव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ताजा मामला अलीपुरदुआर जिले के चिंचुला चाय बागान से सामने आया, जहां एक महिला श्रमिक पर एक तेंदुए ने जानलेवा हमला कर दिया। घटना शुक्रवार को उसे समय घटी, जब चाय बागान की श्रमिक टुलकी मंगर बागान के पांच बी सेक्शन में काम कर रही थीं।अचानक पास के नाले से एक खूंखार लेपर्ड बाहर निकलकर उस पर टूट पड़ा। टुलकी मंगर को बचने का कोई मौका नहीं मिला और तेंदुए ने उसके शरीर के कई हिस्सों पर गहरे पंजे मारे। चंद पलों में ही महिला श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। सौभाग्यवश, आस-पास काम कर रहे अन्य श्रमिकों ने शोर मचाया, जिससे घबराकर तेंदुआ भाग खड़ा हुआ। घायल टुलकी मंगर को तुरंत अन्य श्रमिकों की मदद से लताबाड़ी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर है लेकिन शरीर पर कई गहरी चोटें आई हैं। घटना के बाद पूरे बागान क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल है। इधर घटना की जानकारी मिलने पर बक्स टाइगर रिजर्व वन विभाग के अधिकारी और कर्मी अस्पताल पहुंचे, और घायल श्रमिक की स्थिति का जायजा लेकर सहयोग करने का आश्वासन दिया। घायल महिला श्रमिक ने कहा कि मैं चाय बागान में काम कर रही थी, तभी एक तेंदुआ बागान के नाले से निकलकर मुझ पर कूद गया। मैं खुशकिस्मत थी कि बच गई।

उन्होंने कहा कि चाय बागान इलाके में ऐसी घटनाएं लगभग लगातार हो रही हैं और इस पर खास पहल की जानी चाहिए ताकि हम बिना डरे चाय बागान में काम कर सकें। वहीं बागान की अन्य श्रमिकों का भी कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस इलाके में तेंदुए ने हमला किया हो। जंगलों से सटे होने के कारण अक्सर ऐसे हमले होते रहते हैं, लेकिन वन विभाग द्वारा स्थायी समाधान की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। स्थानीय लोग अब प्रशासन और वन विभाग से मांग कर रहे हैं कि चाय भागना में काम करते वक्त श्रमिकों की सुरक्षा के लिए त्वरित कदम उठाए जाएँ। डुआर्स की खूबसूरती के साथ-साथ अब यहाँ रहने वालों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। सवाल यह है कि कब तक चाय बागान के ये मेहनतकश मजदूर जंगली जानवरों के डर के साये में काम करते रहेंगे?

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