बिंदोल भैरवी मंदिर का उद्घाटन, 69 लाख की लागत से हुआ जीर्णोद्धार

मंच पर उपस्थित राज्यमंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती,सांसद कार्तिक चंद्र पाल, विधायक उत्पल महाराज व अन्य
मंच पर उपस्थित राज्यमंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती,सांसद कार्तिक चंद्र पाल, विधायक उत्पल महाराज व अन्य
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कालियागंज: बिंदोल भैरवी मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद नए स्वरूप का उद्घाटन सोमवार को उत्साह और उमंग के माहौल में किया गया। उत्तर दिनाजपुर जिले के हेमताबाद ब्लॉक के बिंदोल स्थित 16वीं शताब्दी के ऐतिहासिक भैरवी मंदिर का उद्घाटन राज्य की सूचना एवं संस्कृति विभाग की राज्यमंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती ने किया। मंदिर के जीर्णोद्धार पर करीब 69 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। उद्घाटन समारोह में रायगंज के सांसद कार्तिक चंद्र पाल, राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग के अधीन पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के निदेशक राणा देवदास, कालियागंज के विधायक उत्पल महाराज, हेमताबाद के विधायक हरिपद बर्मन सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित हुए । जानकारी के अनुसार, 16वीं शताब्दी में निर्मित यह ऐतिहासिक भैरवी मंदिर लंबे समय से जर्जर अवस्था में था। स्थानीय लोगों की मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए 69 लाख रुपये आवंटित किए। सूचना एवं संस्कृति विभाग के अधीन पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की देखरेख में राज्य के लोक निर्माण विभाग ने मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा किया। मंदिर समिति के सचिव श्यामल समाद्दार ने बताया कि मंदिर के चारों ओर अब तक चारदीवारी नहीं होने के कारण बाहरी लोग विभिन्न कारणों से मंदिर परिसर में प्रवेश कर जाते हैं। उन्होंने मंदिर की सुरक्षा के लिए जल्द से जल्द चारदीवारी बनाने की मांग की।


बिंदोल के समाजसेवी अशोक राय ने कहा कि जीर्णोद्धार के बाद इस बार भैरवी मंदिर में मुख्य पूजा धूमधाम से आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही तीन दिनों तक मेले का भी आयोजन होगा। रायगंज से बिंदोल भैरवी मंदिर की दूरी करीब 22 किलोमीटर है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के कारण दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। करीब 17 वर्ष पहले पश्चिम बंगाल के तत्कालीन राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी ने भी मंदिर का दौरा किया था। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद बिंदोल में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी तथा यह ऐतिहासिक स्थल धार्मिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा।

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