सिलीगुड़ी: रोजाना एक समय ऐसा आता है, जब सिलीगुड़ी की सड़कों पर स्कूल बसों का काफिला शुरू हो जाता हैं | ये कतार इती लंबी होती है कि, उस दौरान सड़क पार करने वालों के पसीने छूट जाते है | देखा जाए तो कई ऐसे मामले है जिसमें स्कूल बस चालकों की लापरवाही के कारण बस हादसे के शिकार भी हो गए हैं | कई मामलों में चालक ट्रैफिक नियम को अनदेखा करते हुए भी पाए गए हैं जिससे विद्यार्थी खतरे के घेरे में पड़ जाते है | यह कितना सच और कितना झूठ है, इसको लेकर सन्मार्ग संवाददाता ने जब स्कूल ,अभिभावक, ट्रैफिक पुलिस से संपर्क किया तो कई प्रकार के खुलासे हुए, जिसके कुछ अंश :
स्कूल में अब पहले से बसों की संख्या कम कर दी गई है और हर बस में कैमरे लगे हुए हैं | छोटे बच्चों के साथ बसों में आया का होना अनिवार्य है, जो बच्चों का ध्यान रखती है | इसके अलावा बड़े बच्चें भी बस के अंदर सुरक्षा के घेरे में रहते है | चालक के अलावा सह चालक हर गतिविधियों पर नजर रखते है | बस चालक को ड्यूटी के दौरान नशे का सेवन करना वर्जित है | जीपीएस ट्रैकर के माध्यम से अभिभावक बस के लोकेशन को देख सकते हैं, इसके अलावा हर बस में फोन नंबर भी दिया हुआ है | यदि बस का लोकेशन ना मिले तो अभिभावक फोन कर भी जानकारी ले सकते हैं | ट्रैफिक पुलिस हमेशा ही सहयोग करते है और सुरक्षा को लेकर बैठक भी की जाती है | :डीपीएस स्कूल ट्रांसपोर्ट विभाग
महाबर्ट स्कूल के ट्रैवल एजेंसी द्वारा जानकारी दी गई की लगभग 28 से 30 बसें चलती है और विद्यार्थियों का विशेष ध्यान रखा जाता है | बस चालकों को लेकर स्कूल प्रबंधन और ट्रैवल एजेंसी दोनों सतर्क रहते हैं | बस चालको व खलासी के लिए कई तरह के नियम कानून भी बनाए जाते हैं, जिन पर उन्हें अमल करना ही पड़ता है | समय-समय पर स्कूल प्रबंधक, ट्रैवल एजेंसी, वाहन चालक और ट्रैफिक पुलिस के साथ बैठक भी की जाती है | परीक्षा के दिनों में विशेष कर बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचना चालकों के लिए चुनौती बन जाता है लेकिन वैसी परिस्थिति में ट्रैफिक पुलिस चालकों का सहयोग करती है |
लंबी दुरी तय कर स्कूल पहुंचने वाले अभिभावकों को हमेशा बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहना पड़ता है | झंकर मोड़ से सालबाड़ी पहुंचना बच्चों के लिए भी चुनौती है और शहर में जाम की समस्या से बच्चें थक भी जाते है | लेकिन स्कूल की ओर से बस सेवा में ध्यान दिया जाता है | उन्हें समय पर स्कूल पहुंचना फिर समय पर घर छोड़ना ये सब बस चालक के कारण ही हो पता है | लेकिन जब तक बच्चा घर न पहुंचे भय तो लगा ही रहता है |
स्कूल प्रबंधक के कार्य से अभिभावक संतुष्ट है | : शिव शंकर पंडित अभिभावक
पूरी तरह विद्यार्थियों का ख्याल रखा जाता है बस में चालक के अलावा सह चालक रहते है | कुछ बच्चें भी शरारती होते है, जो खिड़की में बैठक कर बाहर हाथ निकलना, सामान फेंकना आपस में लड़ाई करते है, वैसी स्तिथि में सह चालक नजर रखते है | बच्चों के बीच विवाद होने नहीं देते और सही सलामत उन्हें घर तक पहुंचा देते है | सिलीगुड़ी में ट्रैफिक जाम की समस्या के बीच स्कूल प्रबंधक और ट्रैफिक पुलिस की सतर्कता साफ दिखती है : रती थापा अभिभावक
विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है ट्रैफिक डीसीपी :
सिलीगुड़ी ट्रैफिक डीसीपी ने बताया कि स्कूल के साथ लगातार संपर्क किया जाता है | विशेष कर स्कूल बस के चालकों पर हमारी नजर बनी रहती है, जब भी कोई संदिग्ध नजर आता है जांच की जाती है | काम के दौरान यदि कोई चालक नशे की हालत में मिलता है तो सख्त कार्रवाई भी की जाती हैं | स्कूल की ओर से नियमों का कितना पालन किया जाता है, बस में सह चालक है की नहीं इन सारी गतिविधियों पर ध्यान दिया जाता है | इसके अलावा समय-समय पर स्कूल प्रबंधन और बस ड्राइवर के साथ एक बैठक भी की जाती है, जिसमें दिशा निर्देश जारी किए जाते हैं | स्कूल बस गुजरने के दौरान ट्रैफिक नियम पर सख्त ध्यान देना हर ट्रैफिक कर्मी की पहली प्राथमिकता है | अभी फिलहाल सड़कों के निर्माण कार्य चल रहे है, वैसे में वैकल्पिक मार्गों की जानकारी भी दे दी जाती है | स्कूल प्रबंधन भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर सचेत रहते हैं |