सिलीगुड़ी में बढ़ते तलाक के मामलों में कैसे लगे रोक

कोर्ट में बढ़ते तलाक के मामले
कोर्ट में बढ़ते तलाक के मामले
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सिलीगुड़ी: भारतीय संस्कृति में विवाह को एक पवित्र और जन्म -जन्मांतर तक चलने वाला बंधन माना गया है | युग बदले, पीढ़ियां बदली उसी के अनुसार विवाह की मान्यता में भी बदलाव आने लगे है | विवाह में जैसे-जैसे आधुनिकता का रंग चढ़ा वैसे-वैसे इसकी डोर भी कमजोर होने लगी | वर्तमान समय में विवाह को निभाना आसान नहीं, इसके लिए प्यार,समझदारी, विश्वास, निरंतर समझौते की जरूरत पड़ती है | तब कहीं जाकर यह पवित्र बंधन बना रहता है | अभी जिस तरह से विवाह समारोह बनावटीपन से भर गया है, ठीक उसी प्रकार तलाक के मामले में बढ़ रहे हैं | जन्म-जन्मांतर का यह बंधन अब हल्के-फुल्के झगड़े में ही कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पहुंच जाता हैं | जिससे समाज को एक गलत दिशा तो मिलता ही है, साथ ही आर्थिक और मानसिक रूप से भी दो परिवार टूट जाता है | इतना ही नहीं अक्सर तलाकशुदा स्त्री व पुरुष दोनों को हीन भावना को भी झेलना पड़ता है | सिलीगुड़ी में लगातार बढ़ते तलाक के मामले को लेकर सन्मार्ग संवाददाता ने समाजसेवी, वकील और फैमिली काउंसलिंग के काउंसलर से संपर्क किया, जिसे उन्होंने शादी टूटने से लेकर बचाने तक के कई उपाय बताएं |

19 से 20 साल का तजुर्बा रखने वाले वकील ने बताया , समय के अनुसार तलाक़ के मामले में बढ़ोतरी हुई है | एक समय ऐसा था जब गिने चुने मामले ही कोर्ट में आया करते थे | लेकिन वर्तमान समय में मेरे पास ही 10 से 12 मामले हर महीने आ जाते हैं और इससे कहीं ना कहीं समाज को हानि हो रही है | इन टूटते रिश्तों में आधुनिकता, मोबाइल फोन व सोशल मीडिया का बहुत बड़ा योगदान है | अभी जिस तरह से खुलापन आ गया है, अब हर कोई हमेशा मोबाइल फोन में ही घुसा रहता है, जिसके कारण एक दंपति अपने रिश्ते को हल्के में लेने लगते हैं और एक दूसरे को समय नहीं दे पाते, साथ ही समय के साथ हालात बिगड़ते चले जाते हैं | उनकी राय है कि यदि रात 10 बजे के बाद इंटरनेट सेवा बंद किया जाए तो ऐसे बहुत से परिवार है जो टूटने से बच जाएंगे | : वकील एस.के गुप्ता

पहले शादी की एक उम्र हुआ करती थी, लेकिन अब समय बीत जाने के बाद एक लड़का और लड़की शादी कर रहे है और बढ़ती उम्र के कारण दोनों में 'मैं' की भावना आपसी तालमेल को बिगाड़ देती है | दो परिवार के बीच भेदभाव भी एक दंपति के जीवन को प्रभावित कर रहे है | अब विवाह में आधुनिकता के कारण कई नए चलन आ रहे है, जिसमें मर्यादा और संस्कृति को हानि पहुंचा रही है | यह भी आगे चलकर तलाक के मामलों को बढ़ाने का काम कर रहे है | तलाक जैसे मामलों को कम करने के लिए काउंसिलिंग और जागरूकता की जरुरत है | कोर्ट भी पहले काउंसलिंग का ही रास्ता अपनाता है | यदि समय पर ही टूटते दंपति को सही तरह से मार्गदर्शन दिया जाए तो तलाक की नौबत नहीं आएगी | : मारवाड़ी युवा मंच मुस्कान शाखा की अध्यक्ष खुशबू मित्तल

एक विवाह का अंत बहुत दुखदायी है | अभी फ़िलहाल तलाक के मामले में बढ़ोतरी हुई है | यहां पर थाना, कोर्ट, वकील द्वारा विभिन्न दंपतियों को काउंसलिंग के लिए भेजा जाता है | इन पांच सालों में लगभग 438 से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं और वही 369 तलाक के मामलों का समझौता किया गया है, लेकिन ऐसे 14 मामले हैं जिसमें तलाक हुए हैं | केंद्र के फंड और राज्य सरकार की निगरानी में चलने वाला इस फैमिली काउंसलिंग सेंटर को 22 महीने से कोई फंड नहीं मिला है | लेकिन किसी तरह कार्यालय चल रहा हैं | उनका कहना है कि सरकार को इस ओर कुछ नियम सख्त करने चाहिए | मोबाइल फोन, सोशल मीडिया , विवाहेतर संबंध, आपसी तालमेल में कमी तो तलाक को बढ़ा ही रहे है और जागरूकता की कमी के कारण ऐसे बहुत से युवा युवती हैं जो कम उम्र में ही शादी कर अंत में तलाक की मांग करते कोर्ट पहुंच जाते है | ड्रग, शराब की लत भी रिश्तों को खोखला बना देता है | यदि काउंसलिंग सेंटर को उन्नत किया जाए तो आने वाले समय में लोगों को अत्यधिक जागरुक कर तलाक के मामले को कम किया जा सकता है | : फैमिली काउंसलिंग सेंटर की सीनियर इंचार्ज व काउंसलर शेफाली गोस्वामी

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