

सिलीगुड़ी : करीब एक महीने तक न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन में प्रवेश पर सख्ती के कारण हॉकरो और छोटे विक्रेताओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। पूजा से पहले प्रवेश को लेकर कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन कमाई की अनिश्चितता अब भी बनी हुई है। ऐसे मुश्किल दौर में पीएम स्वनिधि योजना के तहत मिलने वाला ऋण एनजेपी के हॉकर्स के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आया है। स्टेशन पर कारोबार प्रभावित होने के बाद कई हकार अब इस ऋण के जरिए अपनी आय का वैकल्पिक रास्ता तैयार करने की कोशिश में हैं। पीएम स्वनिधि योजना के तहत आसान शर्तों पर चरणबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। पहली बार एक साल की अवधि के लिए 15 हजार रुपये तक का ऋण मिलता है। समय पर भुगतान करने पर आगे 25 हजार रुपये और फिर 50 हजार रुपये तक ऋण लेने का अवसर मिलता है। ऋण चुकाने के बाद बैंक की ओर से 30 हजार रुपये तक की क्रेडिट कार्ड सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। सिलीगुड़ी नगर निगम की पहल पर विभिन्न इलाकों में शिविर लगाकर हॉकरों और पथ विक्रेताओं को इस योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस ऋण को लेकर हॉकरों के बीच अलग-अलग उम्मीदें हैं। भोलामोड़ निवासी मोहम्मद राजू ऋण की पहली किस्त से ऑनलाइन कपड़ों का कारोबार शुरू करना चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर कारोबार अच्छा चला तो भविष्य में इसे और बड़ा किया जाएगा। वहीं, ट्रेन में घूमकर खाद्य सामग्री बेचने वाले रजत राय को उम्मीद है कि ऋण मिलने पर पूजा से पहले अधिक सामान खरीद सकेंगे। सामान बढ़ेगा तो बिक्री भी बढ़ेगी और परिवार की आमदनी में सुधार आएगा। एनजेपी स्टेशन के एक अन्य हॉकर अधीर कर्मकार ऋण के जरिए पूजा मेले में खाने की दुकान लगाने की योजना बना रहे हैं। उनका लक्ष्य आगे 25 हजार रुपये का ऋण लेकर ठेला खरीदना और सड़क किनारे स्थायी रूप से कारोबार शुरू करना है। उनका मानना है कि इससे स्टेशन की हॉकरी पर निर्भरता और रोजी-रोटी की अनिश्चितता कुछ कम हो सकेगी। वहीं, स्टेशन परिसर में भात का होटल चलाने वाले उत्तम अधिकारी भी इस योजना को कारोबार सुधारने का जरिया मान रहे हैं। उनका कहना है कि आज के समय में दुकान की साज-सज्जा भी ग्राहकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाती है। ऋण मिलने पर वह होटल को नए रूप में तैयार करना चाहते हैं। ऐसे में, स्टेशन में कारोबार की अनिश्चितता के बीच पीएम स्वनिधि का छोटा-सा ऋण इन हॉकर्स के लिए बड़े सपनों का सहारा बन रहा है। किसी को नया कारोबार शुरू करने की उम्मीद है, तो कोई मौजूदा व्यवसाय को मजबूत करना चाहता है।