

कर्सियांग : दार्जिलिंग के तलहटी क्षेत्र के दुधिया में बालासन नदी पर निर्मित ह्यूम पाइप पुल के बार-बार क्षतिग्रस्त होकर बह जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इंडियन गोर्खा जनशक्ति फ्रंट की कर्सियांग की वरिष्ठ नेता अनुजा राई ने पुल के निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी राशि के उचित उपयोग को लेकर जांच की मांग की है। राई ने कहा कि लाखों-करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित पुल का बारिश के दौरान बार-बार क्षतिग्रस्त होना या बह जाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पुल के बार-बार क्षतिग्रस्त होने की घटना को देखते हुए इसके निर्माण, संरचना और गुणवत्ता की गहन जांच आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि आईजीजेएफ प्रमुख अजय एडवर्ड के नेतृत्व और स्थानीय लोगों की सहभागिता से दार्जिलिंग पहाड़ के विभिन्न स्थानों पर निर्मित पुल भारी बारिश और बाढ़ के बावजूद सुरक्षित हैं। राई ने कहा, “एक ओर सरकार द्वारा लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए पुल बार-बार बह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अजय एडवर्ड के नेतृत्व में स्थानीय लोगों की सहभागिता से बनाए गए पुल भारी बारिश और बाढ़ के बीच भी सुरक्षित हैं। यह निश्चित रूप से सोचने का विषय है। राई ने कहा कि सरकारी खर्च से निर्मित पुलों और स्थानीय सहभागिता से बनाए गए पुलों की स्थिति में दिखाई देने वाला अंतर निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग को लेकर सवाल खड़े करता है। उन्होंने संबंधित विभाग से दुधिया ह्यूम पाइप पुल के बार-बार क्षतिग्रस्त होने के कारणों, निर्माण की गुणवत्ता तथा खर्च की गई सरकारी राशि के उपयोग की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने की अपील की। ज्ञात हो कि पिछले कुछ वर्षों में अजय एडवर्ड के नेतृत्व और स्थानीय लोगों के सहयोग से दार्जिलिंग पहाड़ के विभिन्न स्थानों पर कई पुलों का निर्माण किया गया है। आईजीजेएफ का दावा है कि ये पुल वर्तमान में भी भारी बारिश और बाढ़ के बावजूद सुरक्षित हैं। वहीं, दुधिया ह्यूम पाइप पुल के बार-बार बह जाने की घटना ने सरकारी खर्च और निर्माण गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज कर दी है।