सिलीगुड़ी: नाम बड़े और दर्शन छोटे इन दिनों ऐसी हो गई है उत्तर बंगाल के सबसे बड़े थोक बाजार यानी सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट की हालत | एसएमसी को लाखों रुपए मिलने के बाद भी साफ सफाई से वंचित है मार्केट | अब वहां की समस्याओं ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया है कि व्यापार को नुकसान होने लगा है | बाहर के व्यापारी हो या स्थानीय व्यापारी हो रेगुलेटेड मार्केट का नाम सुनते हैं उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं | क्योंकि व्यापारियों को उसी सड़क से होकर गुजरना होगा जो जर्जर हालत में है जहां बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं जो बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रहा है | इतना ही नहीं मार्केट के परिसर में कहीं भी वाहनों को बड़े आराम से पार्क किया जाता है और वाहन पार्किंग के चलते भयावह जाम की स्थिति बन जाती है और समय पर व्यापारियों तक समान नहीं पहुंच पाता,जिसे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है |
रेगुलेटेड मार्केट के चारों ओर विकास हुआ, लेकिन उत्तर बंगाल में खास पहचान रखने वाले इस मार्केट ने अपने अस्तिव को ही खो दिया है | जल निकासी की व्यवस्था न के बराबर है और यहां के नालियों का गंदा पानी सड़कों पर निकल आता है | सूखे के दिनों में तो फिर भी सभी समस्याओं को अनदेखा कर यहां के व्यापारी और मजदूर काम कर लेते हैं | लेकिन बारिश शुरू होते ही वहां का दृश्य भयावह बन जाता है | वहां बारिश अपने साथ कहर लेकर आता है | चारों तरफ पानी ही पानी भर जाता है कीचड़ और गंदगी जल जमाव में तैरने लगते हैं | चारों तरफ दुर्गन्ध फैल जाता है | नाली और सड़क में अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है | उस समय रेगुलेटेड मार्केट का अस्तित्व भी रो-रो कर गुहार मांगने लगता है |
व्यापारी सुरेश सिंह अपनी पुश्तैनी व्यापार को संभाल रहे हैं | उन्होंने बताया कि पहले इतनी समस्या रेगुलेटेड मार्केट में नहीं थी | लेकिन जैसे-जैसे समय बीता यहां एक-एक कर समस्या उत्पन्न होने लगी | 2010 तक फिर भी हालत ठीक था लेकिन अब नजारा कुछ और ही है | एक अन्य व्यापारी ने बताया कि,
पहले यहां पिच रोड था और तब नालियों से भी जल आसानी से बाहर निकल जाता था | लेकिन जब से कंक्रीट के सड़क बनाए गए नालियों से जल निकासी लगभग बंद हो गया है और नाली का गंदा पानी बाहर नहीं निकल पाता है | जो मार्केट के अंदर ही फैला रहता है | हल्की बारिश में ही नालियों का पानी सड़कों में निकल आता है | जिसके कारण बीमारियों का भय और जल जमाव के स्थिति बन जाती है | साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कचरा फेंकने की कोई व्यवस्था नहीं है सभी नली या फिर आसपास में ही कचरे को फेंक देते हैं और कचरे से चारो तरफ दुगंध फैल जाता है |
इसके अलावा अजय कुमार दास नामक व्यापारी ने बताया कि, वे जहां दुकान लगाते हैं वहां हमेशा ही जल जमाव की स्थिति बनी रहती है और गंदे पानी के कारण उनके पैरों को काफी नुकसान पहुंचता है जिसके कारण उनके पांव में जल संबंधित संक्रमण हो गए हैं |
यहां के व्यापारियों ने यह भी बताया कि, एसएमसी और व्यवसायी समिती एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं | समस्याओं का उचित समाधान नहीं निकल पा रहा है |
व्यापारियों से बातचीत करने के बाद इस विषय को लेकर व्यवसाय समिति के सेक्रेटरी अनुपम मैत्रा से जब बातचीत की गई, तो उन्हें चौकाने वाले खुलासे किए | उन्होंने बताया कि, हर महीने एसएमसी को यहां साफ सफाई के लिए 3 लाख 96 हजार दिए जाते हैं | लेकिन फिर भी कार्य न के बराबर है | एसएमसी की ओर से उन्हें बताया गया है 19 कर्मी यहां काम पर तैनात है | लेकिन वे 19 कर्मी क्या कर रहे हैं किस तरह से अपने कार्य को अंजाम दे रहे हैं, कोई सही जानकारी नहीं मिल पाई है | साथ ही बताया पहले यही रकम 1 लाख 80 हजार का था, लेकिन अब बढ़कर 3 लाख 96 हजार किया गया है | बाहर का गंदा पानी तो मार्केट में घुस रहा है लेकिन मार्केट के पानी को बाहर निकालने की कोई व्यवस्था नहीं है | उन्होंने कई दफा एसएमसी से बातचीत की है, लेकिन अभी तक उसका कोई परिणाम नहीं निकाला है | कई बार दूसरे एजेंसियों को कार्य देने के भी सुझाव दिए गए, लेकिन एसएमसी द्वारा सही प्रक्रिया नहीं मिली है |
इसके अलावा अनुपम मैत्रा ने भी व्यापारी और मजदूरों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा, एक ओर मार्केट की हालत दूसरी और समस्या से जूझते व्यापारी और मजदूर उनकी हालत देखकर बुरा लगता है | वे कई तरह की कोशिश तो कर रहे हैं लेकिन अभी तक हालत दुरुस्त नहीं हो पा रहे हैं | जब कि, दिन पर दिन यहां की समस्या और गहराती जा रही है | उन्होंने आश्वासन दिया है कि, आने वाले समय में समस्याओं का समाधान होगा वे निरंतर प्रयास कर रहे हैं |