चाय और जैव विविधता संरक्षण को पर्यटन से जोड़ने पर मंथन

इलाम, मिरिक और तिमी को चाय पर्यटन के साझा क्षेत्र के रूप में विकसित करने की पहल
चाय और जैव विविधता संरक्षण को पर्यटन से जोड़ने पर मंथन
Published on

मिरिक : स्थानीय समुदाय और पर्यटन से जुड़े हितधारकों की भागीदारी से चाय संपदा और जैव विविधता के पुनर्जीवन को लेकर मिरिक में प्रारंभिक विचार-विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नेपाल के इलाम, पश्चिम बंगाल के मिरिक और सिक्किम के तिमी को क्रमशः चाय पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। आयोजकों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य कंचनजंघा क्षेत्र की साझा पहचान को सामने लाते हुए चाय, प्रकृति और स्थानीय समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम में कंचनजंघा टीस्केप ट्रायंगल की अवधारणा को लेकर चर्चा हुई। एसोसिएशन फॉर कंजर्वेशन एंड टूरिज्म के संयोजक राज बसु ने इस अवधारणा को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इसके तहत कंचनजंघा क्षेत्र में समुदाय के नेतृत्व में चाय संपदा, जैव विविधता संरक्षण और पर्यटन को जोड़ने की दिशा में काम करने की परिकल्पना है। सिक्किम के एकमात्र चाय उत्पादन क्षेत्र तिमी से ग्रामीण पर्यटन संस्था डिस्कवर तिमी के प्रतिनिधि अमृत शर्मा, प्रशान्त लामिछाने और जीतबहादुर छेत्री शामिल हुए। मिरिक से दार्जिलिंग सलामेंडर टूरिज्म वेलफेयर सोसाइटी के अश्विनी तामांग, संजीव थापा, कल्याण राई और सत्येन बर्देवा के अलावा होमस्टे संचालक पालसांग स्यांगदेन भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राज बसु ने की। वह पूर्वी हिमालय और इंडो-बर्मा क्षेत्र में पर्यटन से जुड़े विषयों पर विभिन्न राज्य सरकारों के सलाहकार भी रह चुके हैं। संपदा क्षेत्र से जुड़ी डॉ. मधुरा दत्त ने पहल का स्वागत करते हुए कई सुझाव दिए। आयोजकों के अनुसार, इस विचार-विमर्श का उद्देश्य तीनों क्षेत्रों के बीच पर्यटन और चाय आधारित गतिविधियों के लिए सहयोग की संभावनाएं तलाशना है। दार्जिलिंग सलामेंडर टूरिज्म वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित इस प्रथम चरण की बैठक को फलदायी बताया गया। इसकी जानकारी संस्था के कल्याण राई ने दी।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in