ईस्टर्न बाइपास पर खतरे की रफ्तार

- रोज 40 हजार वाहनों का दबाव, हेलमेट से परहेज और ट्रैफिक व्यवस्था की कमी से बढ़ रहे हादसे - भारी ट्रैफिक के बावजूद लापरवाही जारी, दुर्घटनाप्रवण इलाकों पर चिंता
vehicles on the road
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सिलीगुड़ी : ईस्टर्न बाइपास से प्रतिदिन लगभग 40 हजार वाहन गुजरते हैं। इनमें से करीब 10 हजार भारी मालवाहक ट्रक, डंपर और ट्रेलर होते हैं। इसके बावजूद हाथियाडांगा से फकदईबाड़ी और शांतिनगर तक के स्थानीय निवासियों के एक बड़े हिस्से के लिए ईस्टर्न बाइपास आज भी पड़ोस की सड़क बना हुआ है। रोजमर्रा के छोटे-बड़े कामों के लिए इसी सड़क का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसी सोच के चलते व्यस्त इस मार्ग पर हेलमेट पहनने को लेकर स्थानीय दोपहिया चालकों में भारी अनिच्छा देखी जा रही है। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि बस थोड़ी देर के लिए बाहर निकले हैं।

हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो में एक युवक हेलमेट पहनने पर तीखी आपत्ति जताते हुए कहता नजर आया कि दो मिनट के लिए दूध लेने आए हैं, क्या हेलमेट पहनना जरूरी है। सोमवार शाम आशीघर मोड़ पर डेढ़ घंटे चले अभियान में ड्रिंक एंड ड्राइव, बिना हेलमेट बाइक और स्कूटर चलाने के आरोप में 15 लोगों पर जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा नए साल के पहले दिन गुरुवार भी दुर्घटना को रोकने के लिए पुलिस की ओर से अभियान चलाया गया। साथ ही फुटपाथ पर कब्जा कर दुकान लगाने वाले व्यापारियों को भी सख्त चेतावनी दी गई।

जहां एक ओर आम लोगों में जागरूकता की कमी साफ दिखती है, वहीं दूसरी ओर ट्रैफिक व्यवस्था की खामियां भी ईस्टर्न बाइपास पर लगातार सामने आ रही हैं। आशीघर से डंपिंग ग्राउंड तक सड़क के दोनों ओर हमेशा भीड़ रहती है, लेकिन समय के साथ आवश्यक ट्रैफिक ढांचे में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ।

जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने बाइपास के दुर्घटनाप्रवण इलाकों का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि पिछले कुछ महीनों में ढाकेश्वरी काली मंदिर क्षेत्र और बाणेश्वर मोड़ लगातार हादसों के केंद्र बने हुए हैं। ट्रैफिक कर्मियों के अनुसार, इन हिस्सों में सड़क संकरी है। एक लेन से भारी वाहन गुजरने पर ओवरटेक की कोई जगह नहीं बचती, फिर भी जल्दबाजी में ओवरटेक करने की कोशिश में कई बार जानलेवा हादसे हो चुके हैं।

हालांकि सिर्फ सड़क की चौड़ाई को ही इसका कारण नहीं माना जा सकता। सवाल यह भी उठता है कि ट्रैफिक पुलिस की निगरानी कितनी प्रभावी है। जानकारी के अनुसार, आशीघर सब-आउटपोस्ट के अंतर्गत ईस्टर्न बाइपास पर सात स्थानों पर ट्रैफिक पोस्ट बनाने की योजना थी, लेकिन कर्मियों की कमी के कारण केवल पांच जगह ही पोस्ट बन पाए हैं। सबसे अधिक दुर्घटनाप्रवण ढाकेश्वरी काली मंदिर और कानकाटा मोड़ पर अब तक ट्रैफिक पोस्ट नहीं बन सका है।

वर्तमान में आशीघर सब-आउटपोस्ट में केवल 6 अधिकारी, 7 कांस्टेबल और 12 सिविक वॉलंटियर कार्यरत हैं। इतने कम बल के साथ डंपिंग ग्राउंड मोड़ से ढाकेश्वरी काली मंदिर तक के पूरे ईस्टर्न बाइपास को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए सबसे पहले लोगों के मन से पड़ोस की सड़क वाली सोच हटानी होगी। साथ ही जलेश्वरी मोड़ से डंपिंग ग्राउंड मोड़ तक के भीड़भाड़ वाले हिस्सों में ट्रैफिक सिग्नलिंग व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। बाइपास होते हुए भी इस इलाके में दुकानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन पार्किंग की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहन किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं।

डीसीपी (ट्रैफिक) काजी शम्सुद्दीन अहमद ने कहा कि हमारे पास कुल 750 ट्रैफिक कर्मी हैं, जिनसे पूरे मेट्रोपॉलिटन पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र को संभालना पड़ता है। ऐसे में आम लोगों का सहयोग भी बेहद जरूरी है

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