कुप्रथा की बेड़ियां तोड़ेगी दादाभाई की पूजा थीम ‘प्रथा’

45 लाख के बजट में तैयार हो रहा पूजा पंडाल, ‘जीवंत दुर्गा’ में तकनीक और परंपरा का अनोखा संगम
Dada bhai puja pandal
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सिलीगुड़ी : क्या हर प्रथा को सिर्फ इसलिए निभाया जाना चाहिए क्योंकि वह वर्षों से चली आ रही है? समाज में कुछ परंपराएं हमारी संस्कृति और पहचान से जुड़ी होती हैं, तो कुछ ऐसी भी हैं जिन्हें बदलने की जरूरत होती है। इसी सोच को इस बार दुर्गापूजा के जरिए सामने लाने की कोशिश कर रहा है सिलीगुड़ी का दादाभाई स्पोर्टिंग क्लब। क्लब की इस वर्ष की पूजा की थीम ‘प्रथा’ है, जिसके जरिए समाज में मौजूद कुप्रथाओं के खिलाफ एक नई सोच का संदेश देने की तैयारी है। आयोजकों के अनुसार, इस बार मंडप के माध्यम से पुरानी सामाजिक कुप्रथाओं को दर्शाया जाएगा। खासतौर पर शादी के बाद महिलाओं पर होने वाले अत्याचार और उनके साथ होने वाले भेदभाव को विषय बनाया गया है। पूजा समिति का उद्देश्य केवल इन कुप्रथाओं को दिखाना नहीं, बल्कि उन्हें तोड़कर समाज के सामने बदलाव और नई सोच का संदेश रखना है। क्लब के सचिव बाबुल पाल चौधरी ने बताया कि पुराने समय से चली आ रही कई कुप्रथाएं आज भी समाज में किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। शादी के बाद महिलाओं पर अत्याचार जैसी सामाजिक बुराइयों को सामने लाकर उनके खिलाफ लोगों को सोचने के लिए प्रेरित करना ही इस बार की थीम का उद्देश्य है। करीब 45 लाख रुपये के बजट में इस वर्ष का पूजा मंडप तैयार किया जा रहा है। प्रतिमा को कलाकार निरु पाल पारंपरिक शैली में सजा रहे हैं। वहीं, मंडप की रोशनी की जिम्मेदारी सिलीगुड़ी के स्थानीय कारीगरों को दी गई है। हालांकि, इस पूजा का सबसे खास आकर्षण होने वाला है ‘जीवंत दुर्गा’। तकनीक की मदद से प्रतिमा की आंखों को खोलने और बंद करने की व्यवस्था की गई है। पारंपरिक शैली की प्रतिमा और आधुनिक तकनीक का यह अनोखा मेल इस बार श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है। दादाभाई स्पोर्टिंग क्लब सिर्फ पूजा आयोजन तक ही सीमित नहीं रहता। क्लब की ओर से खिलाड़ियों को कपड़े उपलब्ध कराने, नृत्य कार्यक्रम आयोजित करने और जरूरतमंद लोगों के बीच वस्त्र वितरण जैसे सामाजिक कार्य भी किए जाते हैं। इससे पहले क्लब ‘आरात्रिक’, ‘लोकदर्शन’ और ‘पत्थर के प्राण’ जैसी अलग-अलग अवधारणाओं पर पूजा पंडाल तैयार कर चुका है, जिन्हें दर्शकों की सराहना मिली थी। इस बार ‘प्रथा’ के जरिए सामाजिक संदेश, परंपरा और तकनीक के अनोखे मेल से दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने की तैयारी है।

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