खस जनजाति द्वारा सांस्कृतिक उत्सव आयोजित

उत्सव में नृत्य पेश करती बालिकाएं
उत्सव में नृत्य पेश करती बालिकाएं
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जयगांव : परंपरा, आस्था और संस्कृति के अद्भुत संगम के साथ अलीपुरदुआर जिले के जयगांव भुलन चौपथी क्षेत्र में खस जनजाति द्वारा पारंपरिक उधौली पूजा एवं सांस्कृतिक समारोह का भव्य आयोजन संपन्न किया गया। शीत ऋतु के आगमन पर आयोजित होने वाली इस पूजा ने न केवल खस जनजाति की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया, बल्कि तराई, डुआर्स और पहाड़ क्षेत्र से आए हजारों लोगों की उपस्थिति ने इसे एक विशाल लोक उत्सव का रूप दे दिया। उधौली पूजा मुख्य रूप से नेपाली समुदाय की खस जनजाति द्वारा मनाई जाती है। यह पूजा प्रकृति, पशुधन और जीवन-यापन से गहराई से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि जब शीतकाल में खस जनजाति के लोग अपने गृह पालित पशुओं के साथ पहाड़ से नीचे मैदानी इलाकों की ओर आते हैं, तब उधौली पूजा का आयोजन किया जाता है। इसी प्रकार, गर्मी के मौसम में पुनः पहाड़ की ओर लौटते समय उबौली पूजा संपन्न की जाती है। रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ-साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। ढोल, मादल और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर खस जनजाति के युवक-युवतियों ने लोकनृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।


पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों की प्रस्तुतियों ने खस जनजाति की समृद्ध संस्कृति और इतिहास को जीवंत रूप में सामने रखा। इस भव्य आयोजन में दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट, कालचीनी के विधायक विशाल लामा, जेडीए के चेयरमैन गंगाप्रसाद शर्मा सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। अतिथियों ने खस जनजाति की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में जब पारंपरिक संस्कृतियां धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं, ऐसे में उधौली और उबौली जैसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी पहचान और परंपरा से जोड़ने का माध्यम बनते हैं। आयोजक के और से सचिन क्षेत्री और सुदर्शन क्षेत्री ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य यही है कि आने वाली पीढ़ी खस जनजाति की सांस्कृतिक रीति-नीति, लोक विश्वास और परंपराओं को न भूले। भविष्य में भी इस तरह के आयोजन और भी बड़े स्तर पर किए जाएंगे।

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