आशा कर्मियों के आंदोलन के समर्थन में नागरिक सम्मेलन

आशा कर्मियों को न्यूनतम मासिक पारिश्रमिक 15,000 रुपये, इंसेंटिव का भुगतान एकमुश्त व नियमित और आशाकर्मी की मौत होने पर आश्रितों को कम से कम 5 लाख रुपये एकमुश्त आर्थिक मदद समेत कई मांगें
आशा कर्मियों के आंदोलन के समर्थन में नागरिक सम्मेलन
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सिलीगुड़ी : पश्चिम बंग आशा कर्मी यूनियन एवं पौर स्वास्थ्य कर्मी यूनियन का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस आंदोलन समर्थन में नागरिक प्रतिरोध मंच की ओर से बुधवार को बाघाजतिन पार्क रोड पर नागरिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें शहर के प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. डीपी चक्रवर्ती, सूर्य सेन कॉलेज के प्रोफेसर विकास रंजन देव, शिक्षिका रीता ठाकुर, प्रणय चंद्र मंडल आदि ने वक्तव्य रखे। उन्होंने बीती 21 जनवरी को राजधानी कोलकाता में समावेश के लिए राज्य के विभिन्न जिलों से जाने वाली आशा कर्मियों को पुलिस द्वारा रोके जाने, उन पर बल प्रयोग करने एवं उन्हें उनके संवैधानिक अधिकार से रोकने की निंदा की। वहीं, आशा कर्मियों के आंदोलन व उनकी मांगों को जायज ठहराते हुए शासन-प्रशासन से मांगों को अविलंब पूरा किए जाने की मांग की। यह भी कहा कि, एक तरफ सरकार क्लबों को लाखों रुपये दे रही है, उसमें उसे कोई कठिनाई नहीं हो रही है, लेकिन जो लोग काम करते हैं और पैसा मांगते हैं उन्हें पैसा नहीं दिया जा रहा है। यह बहुत बड़ी विडंबना है। आशा कर्मियों के आंदोलन की जीत होगी। हम उनके साथ थे, हैं और रहेंगे।

इस अवसर पर पश्चिम बंग आशा कर्मी यूनियन की दार्जिलिंग जिला अध्यक्ष नमिता चक्रवर्ती ने कहा कि, अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्य भर में आशा कर्मियों का काम रोको आंदोलन लगभग महीने भर से जारी है। उसी आंदोलन की कड़ी में बीती 21 जनवरी को राज्य के सभी जिलों से आशा कर्मी स्वास्थ्य भवन अभियान के लिए राजधानी कोलकाता जा रही थीं। मगर, उन्हें रोका गया। पुलिस ने घरों पर जा कर डराया, धमकाया, स्टेशनों से वापस भेजा, उन सबके बावजूद किसी तरह कोलकाता पहुंच जाने वाली आशा कर्मियों को स्टेशन से बहार नहीं जाने दिया गया। फिर भी, अभियान हुआ तो उन पर भी लाठी चार्ज किए गए। उसके खिलाफ हम लोगों ने अगले ही दिन 22 जनवरी को धिक्कार दिवस मनाया।

उन्होंने आगे कहा कि, अपनी मांगों को लेकर हम आशा कर्मियों का काम रोको आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि हमारी मांगें पूरी नहीं की जाती। हमारी मांग है कि, आशा कर्मियों को न्यूनतम मासिक पारिश्रमिक 15,000 रुपये दिए जाएं। इंसेंटिव का भुगतान अनियमित व किस्तों में नहीं बल्कि एकमुश्त व नियमित हो, कार्यकाल में आशाकर्मी की मौत होने पर उसके आश्रितों को कम से कम 5 लाख रुपये एकमुश्त आर्थिक मदद दी जाए, मातृत्वकालीन अवकाश का लाभ दिया जाए, मोबाइल लेने की जो शर्तें हैं वे सारी शर्तें हटाई जाएं, मोबाइल अनुदान बिना शर्त के दिया जाए, आदि कई मांगे हैं।

उक्त सम्मेलन में पश्चिम बंग पौर स्वास्थ्यकर्मी कॉन्ट्रैक्चुअल यूनियन की दार्जिलिंग जिला अध्यक्ष सरस्वती मुखर्जी, संयुक्त सचिव शांता गोस्वामी व रिंकू विश्वास, आशा कर्मी यूनियन की जिला उपाध्यक्ष बनानी साहा, मीरा विश्वास, सीमा सरकार मौसमी बनर्जी समेत कई आशाकर्मी सम्मिलित हुईं।

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