

गंगटोक : सिक्किम की विपक्षी पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन हिस्सा लिया। पार्टी ने भारतीय निर्वाचन आयोग पर संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी और संस्थागत पक्षपात के आरोप लगाए।
एसडीएफ की आधिकारिक प्रवक्ता योजना खालिंग ने प्रदर्शन स्थल से कहा कि निर्वाचन आयोग की कथित अनियमितताओं का असर सिक्किम पर भी पड़ा है। उन्होंने बताया कि पार्टी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में कथित विसंगतियों के खिलाफ देशभर में चल रहे आंदोलन का समर्थन कर रही है।
खालिंग के अनुसार, देशभर में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए जाने का मुद्दा प्रदर्शन के प्रमुख विषयों में शामिल है। उन्होंने दावा किया कि सिक्किम में भी मतदाता सूची से करीब 52 हजार नाम हटाए गए हैं।
एसडीएफ प्रवक्ता ने वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग की चुनाव लड़ने की अयोग्यता की अवधि में किए गए बदलाव को लेकर भी निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 29 सितंबर 2019 को रविवार और सार्वजनिक अवकाश होने के बावजूद आयोग का कार्यालय खुला और तामांग की छह वर्ष की अयोग्यता अवधि घटाकर एक वर्ष और एक महीने कर दी गई। पार्टी का दावा है कि इस फैसले से तामांग के लिए चुनाव लड़ने और मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ।
एसडीएफ ने इस मामले को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के कथित उल्लंघन और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बताया। पार्टी ने इन मामलों में जवाबदेही तय करने तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया।
यह खबर एसडीएफ की प्रेस एवं प्रचार शाखा की ओर से जारी विज्ञप्ति पर आधारित है। इसमें लगाए गए आरोप पार्टी के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।