जलपाईगुड़ी: राज्य सरकार के निर्देश के बाद गुरुवार को पूरे राज्य में नगर पालिका, पंचायत कार्यालयों और अस्पतालों से जुड़े जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों के रिकॉर्ड की जांच और जब्ती की कार्रवाई शुरू की गई। इसके बाद शुक्रवार से कई जगहों पर जन्म-मृत्यु संबंधी सेवाएं प्रभावित हो गईं, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार सुबह से ही जलपाईगुड़ी नगर पालिका के जन्म-मृत्यु विभाग में लोगों की लंबी कतार देखी गई। काम नहीं होने के कारण कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। लोगों का कहना है कि वे पहले भी कई बार कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अब भी उनका काम पूरा नहीं हो पा रहा है। नगर पालिका सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ महीने तक बंद रहने के बाद गुरुवार सुबह सरकारी जन्म-मृत्यु पोर्टल दोबारा शुरू हुआ था। काम शुरू होने के बाद अचानक सरकारी निर्देश से पोर्टल एक्सेस बंद कर दिया गया और पुलिस कार्रवाई के बाद काम फिर प्रभावित हो गया। राज्य सरकार के निर्देश के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों के पुराने रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई है। बताया जा रहा है कि वर्ष 1971 से 2016 तक जारी प्रमाणपत्रों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी। एक नगर पालिका कर्मचारी ने बताया कि कर्मचारी लंबे समय से पोर्टल खुलने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन काम शुरू होते ही फिर से प्रक्रिया रुक गई। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। भाजपा जिला प्रवक्ता और उपाध्यक्ष बुबाई कर ने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी होने की शिकायतें थीं और इसकी जांच होनी चाहिए। वहीं, जलपाईगुड़ी नगर पालिका के चेयरमैन सैकत चट्टोपाध्याय ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार के निर्देश पर हो रही है और इसमें नगर पालिका की ओर से कुछ करने की गुंजाइश नहीं है।