शब-ए-बरात को ले कुरआन-ख्वानी

शब-ए-बरात को ले कुरआन-ख्वानी
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सिलीगुड़ी : इस्लाम धर्मावलम्बियों के लिए पवित्र रात शब-ए-बरात को ले हर साल की तरह इस साल भी बज्म-ए-इस्लाम (सिलीगुड़ी) नामक संस्था की ओर से कुरआन-ख्वानी (पवित्र कुरआन के सामूहिक पाठ) का आयोजन किया गया। झंकार मोड़ के निकट बर्दवान रोड किनारे स्थित बड़ा कब्रिस्तान (कर्बला) में आयोजित इस कुरआन-ख्वानी में मदरसों के बच्चों व आम लोगों ने सामूहिक रूप में पवित्र कुरआन का पाठ किया एवं दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना में अल्लाह तआला से दुआएं मांगी।

इस कुरआन-ख्वानी में बज्म-ए-इस्लाम (सिलीगुड़ी) के सचिव मोहम्मद वाहिद आलम, कर्बला मस्जिद के इमाम हाफिज अब्दुल कय्यूम अशरफी, मोहम्मद शम्शुद्दीन उर्फ हीरा व अन्य कई मदरसा छात्र सम्मिलित रहे। उल्लेखनीय है कि शब-ए-बरात इस्लामी कैलेंडर के 8वें महीने शोबान की 14वीं और 15वीं तारीख की दरम्यानी रात मनाई जाने वाली एक अत्यंत पवित्र रात है। इसे माफी और इबादत की रात माना जाता है। इस रात मुसलमान रात भर जागकर नमाज पढ़ते हैं, कुरान पढ़ते हैं, और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कब्रिस्तानों में जाकर दुआ करते हैं। इस उपलक्ष्य में घरों में हलवा, खीर और अन्य पकवान बनाए जाते हैं जिसे पड़ोसी और गरीबों में बांटा जाता है। इस वर्ष शब-ए-बरात 3 व 4 फरवरी के दम्यान की रात है।

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