सिलीगुड़ी अस्पताल में घंटों इंतजार के बाद होते डॉक्टरों के दर्शन

सिलीगुड़ी अस्पताल में मरीजों की भीड़
सिलीगुड़ी अस्पताल में मरीजों की भीड़
Published on

 सिलीगुड़ी: वैसे तो डॉक्टर इंसान ही होते हैं लेकिन उनको समाज में भगवान या जीवनरक्षक का दर्जा उनके निस्वार्थ सेवाभाव, चिकित्सा ज्ञान और जीवन बचाने के प्रयासों के कारण दिया जाता है, वैसे में एक डॉक्टर का भी फर्ज बनता है वो इस सम्मान की कद्र करें |

बता दे जो मरीज डॉक्टर को भगवान का दर्जा देते हैं यदि वह एक बार सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में इलाज करने पहुंच जाए तो उसकी यह भावना वहीं समाप्त हो जाएगी | क्योंकि वहां पर अक्सर लापरवाही के नजारे देखने को मिलते हैं | अस्पताल के अनुसार सुबह 9 बजे से फॉम लेने के बाद डॉक्टर मरीजों की जांच शुरू करते है और दोपहर के 2 बजे तक ही मरीजों की जांच की जाती है | मरीज तो किसी भी तरह अस्पताल में पहुंच जाते है, लेकिन डॉक्टर गायब रहते है | वे 11 बजे से पहले नहीं पहुंचते | कुछ एक डॉक्टर को छोड़ कर प्राय सभी डॉक्टर समय के मूल्य को नहीं समझते है | रोज सुबह 9 बजे के बाद मरीज विभिन्न विभागों के बाहर डॉक्टरों के इंतजार में खड़े रहते हैं, कुछ मरीज तो इतने लाचार होते है जो व्हीलचेयर में बैठकर छटपटाते रहते है लेकिन भगवान रूपी डॉक्टर को आने में समय लग जाता है | कुछ माताएं नन्हें बच्चों के साथ तो कुछ अपने बूढ़े माता पिता के साथ घंटों उस कतार में अपनी बारी का इंतजार करते है | कुछ डॉक्टर दोपहर के एक बजे के बाद दर्शन देने आते है और काम निपटा कर 2 बजे वापस चले भी जाते है | चाहे मरीज की हालत कितनी भी गंभीर क्यों न हो 2 बजे के बाद वो जांच नहीं करते |

जब सन्मार्ग संवाददाता ने सिलीगुड़ी जिला अस्पताल परिसर में मरीज से बातचीत की तो उन्होंने कई प्रकार की शिकायत की, उनका कहना है, एक डॉक्टर समय पर नहीं आते जिसके कारण घंटो कतार में खड़े रहना पड़ता है और कभी-कभी तो ऐसा होता है समय के अभाव में डॉक्टर दूसरे दिन आने की सलाह देते हैं | कुछ दवाइयां तो यहां दी जाती है लेकिन प्राय दवाई बाहर से ही खरीदनी पड़ती है जो महंगे होते है | अल्ट्रासाउंड हो या किसी प्रकार का ऑपरेशन उसके लिए लंबे समय दिया जाता है | यदि इस बीच मरीज की हालत गंभीर हो जाए तो उसका जिम्मेदार कौन होगा |

विषय की गंभीरता को देखते हुए जब वार्ड मास्टर ऑफिस के कर्मचारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा,वह इस मामले में नहीं जानते हैं डॉक्टर से जाकर पूछे | अब सवाल यह बनता है कि, जब अस्पताल में डॉक्टर से मिलना इतना आसान होता तो मरीज घंटों कतार में खड़े क्यों होते ? वहीं इस मामले को लेकर सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के सुपरीटेंडेंट डॉ. चंदन घोष से संपर्क किया तो उन्होंने कहा डॉक्टर समय अनुसार ही अपने चेंबर में पहुंचते हैं और मरीजों की जांच करते हैं जिसने भी यह जानकारी दी और आरोप लगाए वह शायद गलतफहमी के शिकार हुए हैं |

उन्होंने मामले की जांच का भी आश्वासन दिया है | देखा जाए तो कुछ दिन पहले ही कई डॉक्टरों द्वारा लिखे गए प्रेस्क्रिप्शन में दवाओं के नाम बेहद अस्पष्ट और अपठनीय और इलाज में अनावश्यक देरी को लेकर हंगामा भी हुआ था | वहीं बीते वर्षों की बात कर तो कई ऐसे मामले आ चुके हैं जिसमें सिलीगुड़ी अस्पताल को विवादों का सामना करना पड़ा है |जैसे: सितंबर 2024, को 76 वर्षीय वृद्ध महिला की अस्पताल प्रबंधन द्वारा भर्ती में देरी के कारण मौत का आरोप परिवार की ओर से लगाया गया था | अक्टूबर 2024, में ही सात वर्षीय बच्चे की बुखार, सर्दी, और खांसी के इलाज के दौरान लापरवाही के चलते मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में काफी हंगामा किया था | अक्टूबर 2024 में अस्पताल से एक नवजात का शव गायब होने के बाद भी उत्तेजना का माहौल बना था | आखिर कब तक सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में इस तरह के लापरवाही के मामले सामने आते रहेंगे, आखिर कब प्रशासन जागेगी और इन लापरवाहियों को लेकर कड़े कदम उठाएगी, यहां आने वाले मरीजों और शहर वासियों को इसका समय का इंतजार है |

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in