नागराकाटा: बाजार में अंडे की कीमत बढ़कर 8 रुपये प्रति पीस तक पहुंच गई है, जबकि सरकार की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों को प्रति अंडा केवल 6.50 रुपये का आवंटन मिलता है। इसके बावजूद आर्थिक दबाव के बीच नागराकाटा के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और गर्भवती एवं प्रसूता महिलाओं को नियमित रूप से अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, जलपाईगुड़ी जिले के कई क्षेत्रों में अंडे की बढ़ी कीमत के कारण आंगनबाड़ी केंद्रों में अंडा वितरण प्रभावित हुआ है, लेकिन नागराकाटा में कार्यकर्ता इसे जारी रखने का प्रयास कर रही हैं। आंगनबाड़ी कर्मी मौसुमी भट्टाचार्य ने बताया कि उधार लेकर या अपनी जेब से खर्च करके भी बच्चों की थाली से अंडा हटने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नागराकाटा में अंडा वितरण बंद होने की खबरें सही नहीं हैं। बामनडांगा चाय बागान की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मालती तेली ने कहा कि बढ़ती कीमतों के कारण परेशानी जरूर हो रही है, लेकिन बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए सेवा बंद करना संभव नहीं है। वहीं, ग्रासमोड़ चाय बागान की सुमित्रा बराइक और चम्पागुड़ी क्षेत्र की देवी प्रधान ने भी बताया कि वे उधार लेकर या निजी खर्च से अंडा वितरण जारी रखे हुए हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों के अनुसार, सरकारी नियम के तहत गर्भवती और प्रसूता महिलाओं को सप्ताह के सातों दिन एक पूरा अंडा दिया जाता है। वहीं बच्चों को सप्ताह में तीन दिन पूरा अंडा और तीन दिन आधा-आधा अंडा देने का प्रावधान है।नागराकाटा ब्लॉक में कुल 377 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। दावा किया गया है कि इनमें से करीब 80 प्रतिशत केंद्रों में अब भी नियमित रूप से अंडा वितरण किया जा रहा है। इधर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने पिछले दो महीनों से पूरा वेतन नहीं मिलने की शिकायत भी की है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार का हिस्सा मिल रहा है, लेकिन राज्य सरकार का हिस्सा अब तक लंबित है। सीडीपीओ की ओर से जल्द भुगतान का आश्वासन दिया गया है।