नागराकाटा: उत्तर बंगाल के चाय बागान क्षेत्रों में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। संसद में दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने चाय श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे उनके बैंक खातों में भेजने का प्रस्ताव रखा है। उनका दावा है कि पश्चिम बंगाल के कई चाय बागानों के श्रमिक अब भी केंद्रीय योजनाओं के वास्तविक लाभ से वंचित हैं। इसी कारण राशि सीधे श्रमिकों के खातों में पहुंचाने की व्यवस्था आवश्यक है। बताया जा रहा है कि उत्तर बंगाल के अन्य भाजपा सांसद भी इस मांग के समर्थन में एकजुट हैं। संसद में मुद्दा उठते ही राजनीतिक बहस तेज हो गई है। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों में कुल मिलाकर लगभग 282 चाय बागान हैं, जहां दो लाख से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। भाजपा का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न भत्तों और विकास योजनाओं की राशि सीधे श्रमिकों तक पहुंचने से वास्तविक लाभार्थियों को फायदा होगा और वंचना की शिकायतें दूर होंगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार इस संबंध में जल्द निर्णय लिया जा सकता है।हालांकि विपक्ष इस प्रस्ताव को चुनाव से पहले की राजनीतिक रणनीति के रूप में देख रहा है। सीपीएम से जुड़े चाय श्रमिक संगठन के नेता अजय महली ने इसे चुनावी स्टंट करार दिया है। उनका कहना है कि पहले भी कई वादे किए गए, लेकिन उनका क्रियान्वयन नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि डुआर्स के बानरहाट क्षेत्र में केंद्र सरकार के अधीन चार चाय बागानों की स्थिति ही वास्तविकता को दर्शाती है, जहां कई श्रमिकों को नियमित वेतन, पीएफ और ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि घोषणाओं और वास्तविक अमल के बीच की खाई को पाटना जरूरी है।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस से जुड़े चाय श्रमिक संगठन के नेता विधान सरकार ने केंद्र पर भेदभावपूर्ण आवंटन का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि असम के चाय बागानों के लिए जितनी राशि आवंटित की जा रही है, पश्चिम बंगाल को उसका आधा भी नहीं मिल रहा। वर्ष 2021-22 के बजट में ‘प्रधानमंत्री चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना’ के तहत पंद्रहवें वित्त आयोग के माध्यम से असम और बंगाल के चाय क्षेत्रों के लिए 1000 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की गई थी। चाय बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में असम में लगभग 344 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि पश्चिम बंगाल में 157 करोड़ रुपये। चालू वित्त वर्ष में असम को 342 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल को 156 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। दो वित्त वर्षों में असम को कुल 686 करोड़ रुपये मिले, जबकि पश्चिम बंगाल को 313 करोड़ रुपये। इन आंकड़ों के आधार पर तृणमूल पहले से ही केंद्र पर भेदभाव का आरोप लगाती रही है। इस बीच अलीपुरद्वार की सभा से तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने चाय श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 300 रुपये करने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि नई सरकार बनने पर पहली मंत्रिपरिषद बैठक में यह निर्णय लिया जाएगा। एक ओर केंद्र की योजनाओं की राशि सीधे खाते में भेजने का प्रस्ताव, तो दूसरी ओर मजदूरी बढ़ाने का आश्वासन—चुनाव से पहले उत्तर बंगाल के चाय बागानों में राजनीतिक मुकाबला और तीखा होता जा रहा।