'अ लेगेसी ऑफ सॉरो' का हुआ लोकार्पण

'अ लेगेसी ऑफ सॉरो' का हुआ लोकार्पण
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सिलीगुड़ी : वरिष्ठ लेखिका एवं पत्रकार शारदा छेत्री द्वारा रचित उपन्यास 'अ लेगेसी ऑफ सॉरो : अ स्टोरी फ्रॉम दार्जिलिंग' का लोकार्पण हुआ। पूर्ण अधिकारी, डॉ. धनीराज छेत्री, एस.बी. ईश्वरण ने लेखिका व प्रकाशक संग इसका लोकार्पण किया। गोरखालैंड के सपने, आंदोलन व जनजीवन की पीढ़ियों की स्मृति पर प्रकाश डालते इस उपन्यास को स्लैमैंडर इम्प्रिन्ट्स द्वारा प्रकाशित किया गया है जो कि बुक-ऐंट पब्लिकेशन हाउस की एक इकाई है। इसके लोकार्पण समारोह में लेखिका संग लेखिका व पत्रकार अनुराधा शर्मा का एक रोचक संवाद आयोजित हुआ।

लेखिका शारदा छेत्री ने कहा कि, 'यह उपन्यास उस पीड़ा को संबोधित करने का प्रयास है, जिसे हम पीढ़ी दर पीढ़ी झेलते आ रहे हैं जब हम नेपाली जातीय पहचान और भारतीय राष्ट्रीय पहचान के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करते हैं। अलग राज्य की मांग के भीतर सुलगते ‘होने’ और ‘अपनत्व’ के प्रश्न बुझने से इनकार करते अंगारों की तरह हैं। हम उन्हीं अंगारों को अपने दुःख की विरासत के रूप में ढोते आ रहे हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, 'यद्यपि कथा के केंद्र में महिला पात्र हैं, फिर भी इस उपन्यास को केवल नारीवादी कृति के रूप में सीमित नहीं किया जाना चाहिए। यह लिंग की सीमाओं से परे मानवीय हानि, पहचान और धैर्य के अनुभवों की पड़ताल करता है।'

इस उपन्यास के प्रकाशक राजा पुनियानी ने कहा कि, यह उपन्यास दार्जिलिंग पहाड़ियों की तीन काल्पिनक महिला पात्रों की कहानी है जो तीन दशकों से अपने दुखों को ढोती आ रही हैं और फिर एक बार जून से सितंबर 2017 के बीच शांत पहाड़ी नगर को प्रभावित करने वाले गोरखालैंड आंदोलन में उलझ जाती हैं। यह कथा क्षेत्रीय सीमाओं से कहीं आगे तक गूंजती है। यह उन सभी लोगों से संवाद करती है जो पहचान, अपनत्व और विरासत में मिली स्मृतियों के प्रश्नों से जूझते हैं। यह पुस्तक स्मृति की नाजुकता और पीड़ा की अमिट विरासत पर एक गंभीर और चिंतनशील मनन प्रस्तुत करती है। गोरखालैंड आंदोलन पर अनेक लोगों ने अनुभव किया, लिखा और विचार किया है, किन्तु यह उपन्यास कथा को एक गहरे भावनात्मक और ऐतिहासिक स्तर पर ले जाता है। लेखिका की शैली शांत, प्रवाहपूर्ण और गहन अंतर्दृष्टियों से परिपूर्ण है।

पुस्तक के औपचारिक लोकार्पण उपलक्ष्य में प्रकाशक की ओर से लेखिका को सम्मानित भी किया गया। समारोह का संचालन बुक-ऐंट के संपादक, पूर्व पत्रकार, लेखक व अनुवादक विश्व योंजन ने किया। इस अवसर पर प्रख्यात लेखक डॉ. सत्यदीप एस. छेत्री, मिलन रुचाल, डॉ. विधान गोले, सुब्रत दत्त, शेबंती घोष, मंदिरा घीसिंग, प्रीति ब्राह्मिण, लतिका जोशी, लेखा राय व लक्ष्मण दाहाल सहित अनेक गणमान्य स​म्मिलित रहे। 

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