

सिलीगुड़ी : कभी बच्चों की चहल-पहल और किलकारियों से गूंजने वाला स्कूल परिसर, आज लगभग वीरान नजर आता है। जिस स्कूल में कभी बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ने आते थे, वहां अब छात्रों की संख्या घटकर महज तीन रह गई है। यह तस्वीर है करीब 75 साल पुराने रथखोला बापूजी प्राथमिक स्कूल की, जिसके अस्तित्व पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। साल 1951 में शुरू हुए इस स्कूल से रथखोला और आसपास के इलाके के कई बच्चों ने अपने शिक्षा जीवन की शुरुआत की। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस स्कूल से पढ़कर कई छात्र आगे चलकर समाज में अपनी पहचान बना चुके हैं। लेकिन समय के साथ शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और अभिभावकों की पसंद बदलने के कारण स्कूल की तस्वीर भी बदलती चली गई। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, 2011 के बाद प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलाव और प्राथमिक स्कूलों को हाई स्कूलों के साथ जोड़ने की प्रक्रिया के बाद यहां छात्रों की संख्या लगातार कम होती गई। वर्तमान में स्कूल में सिर्फ तीन छात्र और दो शिक्षक-शिक्षिकाएं हैं। स्कूल की प्रधानाचार्या गीता सरकार के मुताबिक, कम छात्रों के साथ-साथ स्कूल की बुनियादी सुविधाएं भी बड़ी चिंता का विषय हैं। स्कूल में बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। वहीं, उचित रसोईघर नहीं होने के चलते बच्चों के लिए मिड-डे मील भी स्कूल के बरामदे में तैयार करना पड़ता है। कभी बच्चों के खेल से गुलजार रहने वाला स्कूल का मैदान भी अब पूरी तरह स्कूल के इस्तेमाल में नहीं है। मैदान में पूजा और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जबकि मैदान के एक हिस्से का इस्तेमाल पार्किंग के लिए भी किया जा रहा है। प्रधानाचार्या का मानना है कि अगर स्कूल के बुनियादी ढांचे में सुधार किया जाए और सुविधाएं बढ़ाई जाएं, तो अभिभावकों का भरोसा दोबारा जीता जा सकता है और स्कूल में बच्चों की संख्या भी बढ़ सकती है। उन्होंने प्रशासन से स्कूल की स्थिति पर ध्यान देने और जरूरी कदम उठाने की अपील की है। साथ ही उनकी मांग है कि सिर्फ छात्रों की संख्या कम होने के कारण 75 साल पुरानी इस ऐतिहासिक शिक्षण संस्था को बंद न किया जाए।