17 सितंबर को मिरिक पहुंचेंगे टुल्कु थामथोग रिम्पोछे

17 सितंबर को मिरिक पहुंचेंगे टुल्कु थामथोग रिम्पोछे
Published on

मिरिक : परम पूजनीय टुल्कु थामथोग रिम्पोछे का 17 सितंबर को मिरिक आगमन होने जा रहा है। उनके आगमन की खबर से क्षेत्र के बौद्ध धर्मावलंबियों में विशेष उत्साह है। रिम्पोछे के स्वागत एवं कार्यक्रम को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। परम पूजनीय टुल्कु थामथोग रिम्पोछे विश्वप्रसिद्ध तिब्बती बौद्ध आचार्य, विद्वान एवं मानवतावादी व्यक्तित्व हैं। वे वर्ष 2009 से 2025 तक भारत के धर्मशाला स्थित परम पावन 14वें दलाई लामा के निजी विहार नामग्याल गुम्बा के मठाधीश रहे हैं। इसके अलावा वे इटली स्थित चे पेल लिंग तिब्बती बौद्ध अध्ययन संस्थान तथा वियतनाम स्थित केन्शेलिंग धर्म केंद्र के आध्यात्मिक निदेशक भी हैं। सेरा जे महाविहार में गहन अध्ययन के बाद रिम्पोछे ने सर्वोच्च शैक्षिक उपाधि ‘ल्हाराम्पा गेशे’ प्राप्त की। उनके मिरिक आगमन को लेकर अनुयायियों में काफी उत्साह है। रिम्पोछे के आगमन को लेकर उत्साहित अनुयायी संजय स्यांगबो ने बताया कि रिम्पोछे का प्रमुख उद्देश्य धर्म, जाति, राष्ट्रीयता, भाषा, संस्कृति और सामाजिक पृष्ठभूमि की सभी भिन्नताओं से ऊपर उठकर संपूर्ण मानव समुदाय को एकता, सद्भाव, पारस्परिक सम्मान और विश्वशांति की भावना से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म के संरक्षण, शिक्षा एवं संस्कार के साथ विश्वशांति को बढ़ावा देने तथा समस्त प्राणीमात्र के सुख, शांति और कल्याण के लिए रिम्पोछे का जीवन समर्पित है। बताया गया कि रिम्पोछे चार दशकों से अधिक समय से एशिया, यूरोप और अमेरिका के विभिन्न देशों में बुद्ध की करुणा, प्रज्ञा, शांति और मानव कल्याण की शिक्षाओं का प्रसार करते आ रहे हैं। भिक्षु-भिक्षुणियों और गृहस्थ अनुयायियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने हजारों विद्यार्थियों एवं साधकों को प्रेरित किया है। कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में भी रिम्पोछे ने ऑनलाइन धर्मदेशना के माध्यम से लोगों का मनोबल बढ़ाया। इसके साथ ही उन्होंने खाद्यान्न, वस्त्र एवं अन्य आवश्यक सामग्री वितरित कर असहाय और जरूरतमंद लोगों की सहायता की। उनके इन कार्यों से अनेक लोगों को आशा, सांत्वना और प्रेरणा मिली है।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in