

किताबों से हमें जानकारियां और शिक्षा मिलती हैं। किताबें सच्ची दोस्त होती हैं। सन
2000 में एक सर्वेक्षण में प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कारकर्ता जोहान गुटेनबर्ग को
सहस्राब्दी पुरुष इस लिए चुना गया कि उन्होंने प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार किया था।
प्रेस से आसानी से एक पुस्तक की हजारों लाखों प्रतियां छापना संभव हो गया अर्थात
कोई भी पुस्तक पाठकों को प्राप्त करना आसान हो गया जबकि प्रिंटिंग प्रेस के
आविष्कार से पहले ऐसा नहीं था क्योंकि तब पुस्तकें पत्थर की शिलाओं या पेड़ के
पत्तों पर लिखी जाती थी।
इतिहास की बातें या किसी भी अन्य चीज के बारे में हम किताबों से जानते हैं, इसलिए
हमें किताबों की कद्र करनी चाहिए। यहां तुम्हारे लिए किताबों की कद्र करने के कुछ
तरीके हम बता रहे हैं।
किताबें गंदे हाथों से न पकड़ें अन्यथा किताबें गंदी हो जाएंगी। कुछ खाते पीते हुए
किताबें नहीं पढ़नी चाहिए अन्यथा किताबों पर खाने-पीने वाली वस्तु गिर जाएगी।
किताबों के पन्ने मोड़ें नहीं। पढ़ने के दौरान जब किताब छोड़नी पड़ जाती है तो किताब
का पन्ना मोड़कर किताब रखना या किताब को खोल कर रखना बहुतों की आदत
होती है। ऐसा न करें अन्यथा किताब की सेहत खराब होगी। जहां पढ़ना छोड़ा है वहां
निशान भी न लगाएं बल्कि वहां कागज का एक टुकड़ा या बुकमार्क रख दें।
अल्मारी में किताबें एक दूसरे के ऊपर न रखें। निकालते समय पन्ने ख्ंिाचते हैं और
बार-बार ऐसा होने पर किताब फट जाती है। किताबों को एक दूसरे से सटाकर खड़ी
स्थिति में रखें।
किताबें पढ़ने के लिए पढ़ाकू दोस्त बनाओ। दूसरे बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित
करो। पढ़ने वाले बच्चों से किताबों का आदान-प्रदान करो और किताबें खरीदने से
पहले आपस में विचार-विमर्श करो ताकि हर पाठक अलग-अलग विषय की किताब
खरीदे और अदल-बदल कर सब उसे पढ़ सकें।
किताबों का कोई हिस्सा काटना नहीं चाहिए। अगर कुछ खास चीज अपने पास रखनी
ही हो तो उसे नोट बुक में नोट कर लें या फोटोकापी करवा लें।
किसी की किताब मांग कर ही लेनी चाहिए और पढ़कर लौटा देनी चाहिए सही-
सलामत। किताब की चोरी या किताब में से पन्ने फाड़ लेना बुरी बात है।
पत्रिकाओं के साथ भी बदसलूकी न करें। इन्हें भी सहेज कर रखें। मांगी गई किताब,
पत्रिका, अखबार से सामान्य ज्ञान या अन्य खास चीजें नोट कर रख लें। इससे ज्ञान
का एक भंडार तुम्हारे पास हो जाएगा। अयोध्या प्रसाद ’भारती‘(उर्वशी)