वर्मा: छात्रवृत्ति और डिजिटलीकरण से वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़े

छात्रवृत्ति और डिजिटलीकरण से वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़े: वर्मा
वर्मा: छात्रवृत्ति और डिजिटलीकरण से वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़े
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केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने शनिवार को कहा कि सरकार ने पिछले 12 वर्षों में छात्रवृत्ति, कोचिंग सहायता, विदेश में पढ़ाई और शोध फेलोशिप के जरिए सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक अवसरों का विस्तार किया है।

सरकार की 2014-15 से 2025-26 तक की शैक्षणिक पहलों का उल्लेख करते हुए वर्मा ने बताया कि अनुसूचित जाति और अन्य वर्गों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 4,893 करोड़ रुपये जारी किए गए। इस अवधि में करीब तीन करोड़ विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला।

उन्होंने कहा कि केवल 2025-26 में इस योजना के तहत 562 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिससे लगभग 27 लाख विद्यार्थियों को सहायता मिली। वहीं, अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 12 वर्षों में 46,581 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी गई और करीब 6.13 करोड़ लाभार्थी दर्ज किए गए। वर्ष 2025-26 में इस योजना से 47.53 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिला।

वर्मा ने कहा कि शिक्षा सामाजिक सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण आधार है। आर्थिक सहायता से वंचित वर्गों के विद्यार्थी अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं और उच्च शिक्षा, शोध तथा पेशेवर करियर के अवसर हासिल कर सकते हैं।

मंत्री के अनुसार, 2021-22 से छात्रवृत्ति राशि सीधे लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी जा रही है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था से भुगतान में पारदर्शिता बढ़ाने, देरी और गड़बड़ियों को कम करने में मदद मिली है। डिजिटल सत्यापन, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और ई-केवाईसी के साथ डिजिलॉकर तथा एपीआई सेतु के एकीकरण ने भी व्यवस्था को मजबूत किया है।

उन्होंने बताया कि एससी और ओबीसी विद्यार्थियों के लिए मुफ्त कोचिंग योजना के तहत 2025-26 में 9.87 करोड़ रुपये खर्च कर 854 विद्यार्थियों को लाभ दिया गया। अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों की टॉप क्लास एजुकेशन योजना का खर्च 2014-15 के 19 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 117 करोड़ रुपये हो गया। इसके लाभार्थियों की संख्या भी 1,568 से बढ़कर 4,742 हो गई।

राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना के तहत 2025-26 में 55 करोड़ रुपये खर्च किए गए और संबंधित चयन वर्ष में 67 विद्यार्थी विदेश पढ़ाई के लिए गए। वहीं, अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप के तहत 2025-26 में 4,218 शोधार्थियों को सहायता मिली। इस पर 213 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

वर्मा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, विदेश में पढ़ाई और शोध तक विद्यार्थियों को लगातार सहायता देना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के तहत सरकार सभी समुदायों के समावेशी विकास और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध है।

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