

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार को घोषणा की कि सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम ‘काशी तमिल संगमम’ (केटीएस 5.0) का पांचवां संस्करण 28 नवंबर से 12 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कार्यक्रम के लिए पंजीकरण पोर्टल भी शुरू किया। इस आयोजन का उद्देश्य प्राचीन ज्ञान केंद्रों तमिलनाडु और काशी के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करना और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को बढ़ावा देना है।
जोशी ने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत में सांस्कृतिक एकता की मजबूत परंपरा रही है। धार्मिक परंपराओं के तहत बड़ी संख्या में लोग काशी और रामेश्वरम की यात्रा करते रहे हैं, जो देश के उत्तर और दक्षिण के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, पेशेवर, किसान, कलाकार, महिलाएं और आध्यात्मिक विद्वान शामिल होंगे। काशी तमिल संगमम के उद्देश्यों से विद्यार्थियों को परिचित कराने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह आयोजन राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और भारत की साझा सभ्यतागत विरासत का उत्सव मनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
काशी तमिल संगमम का पहला संस्करण वर्ष 2022 में आयोजित किया गया था। पिछले चार संस्करणों के दौरान दोनों क्षेत्रों के बीच ज्ञान, भाषा, परंपराओं और जीवन के अनुभवों का सार्थक आदान-प्रदान हुआ है। इस कार्यक्रम का आयोजन उच्च शिक्षा मंत्रालय, आईआईटी मद्रास, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), चेन्नई स्थित केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान (सीआईसीटी), उत्तर प्रदेश सरकार और संस्कृति, रेलवे, स्कूली शिक्षा, पर्यटन, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, सूचना एवं प्रसारण तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता सहित विभिन्न मंत्रालयों के सहयोग से किया जाता है।
केटीएस 5.0 की थीम ‘तिरुक्कुरल पढ़ें — तिरुक्कुरल अभ्यास करें’ रखी गई है। इसका उद्देश्य प्राचीन तमिल ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ की कालजयी नैतिक और चारित्रिक शिक्षाओं को देशभर के युवाओं और विद्यार्थियों तक पहुंचाना है। इच्छुक लोग 22 अक्टूबर से 13 नवंबर तक आईआईटी मद्रास के आधिकारिक पोर्टल पर सात श्रेणियों—विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक एवं मीडिया पेशेवर, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, पेशेवर एवं कारीगर, महिलाएं और आध्यात्मिक नेता—के तहत पंजीकरण करा सकते हैं।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, देशभर के 1,000 उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की भागीदारी से जुड़ा कार्यक्रम चलाया जाएगा, ताकि विभिन्न विषयों और भाषाई पृष्ठभूमियों के छात्रों को तिरुक्कुरल की शिक्षाओं से परिचित कराया जा सके। इसके तहत अध्ययन, शोध और परिसर-आधारित गतिविधियां आयोजित होंगी। तमिलनाडु के विशेषज्ञ वाराणसी के स्कूलों और कॉलेजों का दौरा कर परिचयात्मक सत्रों, संवाद कार्यक्रमों और प्रश्नोत्तरी के माध्यम से विद्यार्थियों को ग्रंथ के मूल्यों से अवगत कराएंगे। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय के सहयोग से वाराणसी के स्कूलों में पढ़ने की आदत, कहानी सुनाने और रचनात्मक गतिविधियों पर संवाद सत्र भी आयोजित करेगा।