

प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पिछले हफ्ते ही, चुनाव आयोग ने सभी स्कूलों के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की एक सूची तैयार करने के निर्देश जारी किये थे। अब, अलग-अलग जिलों के स्कूल निरीक्षकों ने हेडमास्टरों को सूचित किया है कि सभी शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए होने वाले ट्रेनिंग सेशन में जरूर शामिल होना होगा। शिक्षक समुदाय का एक तबका यह तर्क दे रहा है कि हालांकि शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी हर चुनाव में शामिल होते हैं, लेकिन जिस तरह से चुनाव आयोग इस साल उन्हें शामिल करना चाहता है, उससे स्कूल लगभग खाली हो जाएंगे, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।
एक स्कूल की हेडमिस्ट्रेस ने बताया कि उनके स्कूल में अभी अलग-अलग कक्षाओं की विभिन्न परीक्षाएं चल रही हैं। हालांकि स्कूल में लगभग 46 स्टाफ हैं, लेकिन अभी कैंपस में बहुत कम शिक्षक ही मौजूद हैं। बाकी सभी को चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में भेज दिया गया है। 'बीएलओ व पोलिंग स्टाफ एकता मंच' के महासचिव स्वपन मंडल ने कहा कि इस तरह से काम करना मुमकिन नहीं है। छात्रों के प्रति हमारी जवाबदेही है, उस ज़िम्मेदारी से पूरी तरह से पीछे हटने के लिए हमें मजबूर किया जा रहा है। एक तरफ परीक्षाएं हैं तो दूसरी तरफ चुनाव होने से शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को काम के भारी बोझ के कारण नियमित पढ़ाई-लिखाई से समझौता करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।