इंजीनियरिंग के बिना कैसी होती आपकी रोजमर्रा की जिंदगी?

अलार्म बजने से लेकर UPI Payment, मेट्रो, मोबाइल और AC तक, रोजमर्रा की जिंदगी का बड़ा हिस्सा इंजीनियरिंग पर टिका है
इंजीनियर्स डे पर इंजीनियरों को सलाम।
इंजीनियर्स डे पर इंजीनियरों को सलाम।
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सुबह मोबाइल का अलार्म बजता है। आप उठते हैं, फोन देखते हैं और WhatsApp पर आए मैसेज पढ़ते हैं। फिर नल खोलकर पानी भरते हैं, लिफ्ट से नीचे आते हैं और रास्ते में Google Maps देखकर ट्रैफिक का अंदाजा लगाते हैं।

मेट्रो या बस से सफर करते हैं। दुकान पर चाय लेते हैं और UPI से पैसे भेज देते हैं। शाम को घर लौटकर AC या पंखा चलाते हैं, खाना मंगाते हैं और रात में मोबाइल पर कोई फिल्म या सीरीज देखते हुए सो जाते हैं।

यह सब इतना सामान्य है कि शायद ही कभी सोचते हैं कि इन छोटी-छोटी सुविधाओं के पीछे कितनी इंजीनियरिंग काम कर रही है।

सुबह का पानी भी अपने आप नहीं आता

नल खोलते ही पानी आ जाना हमारे लिए रोज की बात है। लेकिन इसके पीछे पानी को जमा करने, साफ करने, पंप करने और पाइप के जरिए घरों तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था होती है।जल प्रबंधन और सिंचाई के क्षेत्र में सर एम. विश्वेश्वरैया का योगदान इसी वजह से खास माना जाता है। उनके काम का बड़ा हिस्सा पानी और बुनियादी ढांचे से जुड़ा था। यानी इंजीनियरिंग सिर्फ मशीन बनाने का नाम नहीं। कई बार इसका काम ऐसी व्यवस्था तैयार करना होता है, जो लाखों लोगों की रोजमर्रा की जरूरत पूरी करे।

लिफ्ट का एक बटन और पीछे पूरी तकनीक

आपने लिफ्ट में सिर्फ एक बटन दबाया और कुछ सेकंड बाद दूसरी मंजिल पर पहुंच गए।लेकिन लिफ्ट को सुरक्षित तरीके से ऊपर-नीचे चलाने के लिए मोटर, बिजली, सेंसर, नियंत्रण प्रणाली और मजबूत ढांचे की जरूरत होती है। हमारे लिए यह सिर्फ ‘लिफ्ट आ गई’ है। इंजीनियर के लिए इसके पीछे पूरी व्यवस्था है।

मेट्रो में बैठते हैं, इंजीनियरिंग नहीं देखते

मेट्रो में बैठकर हम अपने स्टेशन के बारे में सोचते हैं, लेकिन उस सफर को संभव बनाने वाली तकनीक पर ध्यान नहीं देते।पटरियां, स्टेशन का ढांचा, बिजली, ट्रेन की मशीनरी, सिग्नल और सुरक्षा व्यवस्था—इन सबमें अलग-अलग क्षेत्रों की इंजीनियरिंग शामिल होती है। यानी रोज का आपका मेट्रो सफर भी इंजीनियरिंग की एक चलती-फिरती मिसाल है।

मोबाइल आपकी जेब में रखा छोटा-सा तकनीकी संसार है

फोन से कॉल करना, फोटो खींचना, वीडियो देखना या मैसेज भेजना आज बिल्कुल सामान्य है।लेकिन आपके हाथ में मौजूद इस छोटे से फोन में Electronics, Computer Technology, Communication और Software का मेल है। आपको सिर्फ एक स्क्रीन दिखाई देती है। उसके पीछे कई तकनीकी प्रणालियां एक साथ काम कर रही होती हैं।

UPI Payment के कुछ सेकंड

दुकान पर QR Code स्कैन किया, PIN डाला और Payment हो गया। इतनी आसानी के पीछे डिजिटल नेटवर्क, बैंकिंग प्रणाली, Software, सुरक्षा व्यवस्था और कई तकनीकी प्रणालियां काम करती हैं। इसी तरह जब आप किसी ऐप से खाना मंगाते हैं या Google Maps पर रास्ता देखते हैं, तो आपकी स्क्रीन के पीछे लगातार कई तकनीकी प्रक्रियाएं चल रही होती हैं।

घर में भी इंजीनियरिंग कम नहीं

पंखा चलाना हो, AC से कमरा ठंडा करना हो या फ्रिज में खाना सुरक्षित रखना हो—हर जगह इंजीनियरिंग मौजूद है। AC में तापमान नियंत्रित करने वाली तकनीक है। फ्रिज में ठंडा रखने की व्यवस्था है। पंखे में बिजली और मोटर काम करती है। हमारे लिए ये घरेलू उपकरण हैं। इंजीनियरिंग की नजर से देखें तो ये अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल करने वाली मशीनें हैं।

इंजीनियरिंग की सबसे खास बात?

वह अक्सर दिखाई नहीं देती।

जब नल से पानी आता है, हम पानी देखते हैं।
जब मेट्रो समय पर आती है, हम ट्रेन देखते हैं।
जब UPI Payment सफल होता है, हमें सिर्फ ‘Payment Successful’ दिखाई देता है।
जब AC कमरा ठंडा करता है, हमें सिर्फ ठंडक महसूस होती है।

इन सुविधाओं के पीछे काम करने वाली तकनीक नजर नहीं आती। शायद यही इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी सफलता है—जब सब कुछ ठीक चलता है, तो उसके पीछे की मेहनत दिखाई ही नहीं देती। 15 सितंबर को राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ एक महान इंजीनियर को याद करने का मौका नहीं, बल्कि उन तकनीकों और व्यवस्थाओं को समझने का भी दिन है, जिन पर हमारी रोज की जिंदगी टिकी हुई है।

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