

प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया को लेकर घर-घर में बहस छिड़ी हुई है। एक ओर जहां अभिभावक इसे पढ़ाई में बाधा और समय की बर्बादी मानते हैं, वहीं दूसरी ओर युवा इसे सीखने, नेटवर्किंग और करियर निर्माण का एक सशक्त माध्यम बताते हैं। आज की डिजिटल दौर में स्कूल और कॉलेज के छात्रों की दिनचर्या में सोशल मीडिया अहम हिस्सा बन चुका है। आजकल के बच्चे और यूथ इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर काफी ज्यादा सक्रिय हैं। कई मामलों में वे इसका काफी सही और सटीक उपयोग कर रहे हैं, वहीं कूछ ऐसे बच्चे भी हैं, जिनका ध्यान भटक रहा है।
अभिभावकों की चिंता, युवाओं का अपना पक्ष
इस बारे में अभिभावकों का कहना है कि सोशल मीडिया बच्चों का ध्यान पढ़ाई से हटा रहा है। बच्चे पूरा दिन रील्स और शॉर्ट वीडियो की दुनिया में खोए रहते हैं, जो उनके भविष्य के लिए ठीक नहीं है। वहीं दूसरी तरफ युवा सोशल मीडिया को अवसरों की दुनिया मानते हैं। उनके मुताबिक आने वाला समय आधुनिकता का है, ऐसे में समय के साथ अपडेट रहना बहुत जरूरी है। हालांकि कई बच्चे इसका इस्तेमाल पॉजिटिव तरीके से करते हैं, जैसे कंटेंट क्रिएशन, वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग और डिजिटल मार्केटिंग जैसी स्किल्स सीखकर फ्रीलांसिंग या पार्ट-टाइम इनकम भी कमा रहे हैं। वहीं जिन बच्चों का ध्यान काफी जल्दी भटक जाता है, उनके लिए यह घातक साबित हो रहा है।
क्या कहना है स्कूल मैनेजमेंट का?
श्री जैन विद्यालय के प्रिंसिपल संजय पाण्डेे ने कहा कि सोशल मीडिया न पूरी तरह दुश्मन है, न ही पूरी तरह दोस्त। यह एक ऐसा उपकरण है, जिसका प्रभाव उसके उपयोग पर निर्भर करता है। श्री शिक्षायतन स्कूल की प्रिंसिपल संगीता टंडन ने कहा कि संतुलन, जागरूकता और सही दिशा के साथ सोशल मीडिया नई पीढ़ी के लिए अवसरों का पुल बन सकता है, अन्यथा यह पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर भी डाल सकता है। हमें तकनीक का नियंत्रन के साथ उपयोग करना है, न कि तकनीक हमें नियंत्रित करे, इसका ध्यान रखना है। स्कूल में काफी पेरेंट्स अपने बच्चों के फोन एडिक्शन को लेकर शिकायत करने आते हैं।