

प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) परीक्षा में ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने के लिए खास नियम लागू कर रहा है, ताकि अगर कोई कैंडिडेट परीक्षा के दौरान नकल करते पकड़ा जाए, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके और कोई विवाद न हो। यह फैसला यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग में लिया गया। इसके साथ ही, मेंबर्स ने प्रोफेसर शाश्वती हल्दर के लिए अपना सपोर्ट भी जताया। इंग्लिश डिपार्टमेंट की पूर्व हेड शाश्वती हल्दर पर एक स्टूडेंट की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगा था।
उस घटना में पिछले दिसंबर में एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई गई थी। स्टेट माइनॉरिटी कमीशन के मेंबर्स ने वाइस-चांसलर से बात की। उन्होंने शाश्वती को छुट्टी पर भेजने की सलाह दी। 7 जनवरी को शाश्वती ने छुट्टी के लिए अप्लाई किया और वाइस-चांसलर ने इसे मंजूर कर दिया था। इस बारे में, EC मेंबर्स ने मंगलवार को मीटिंग की और एकमत से फैसला किया कि शाश्वती अपनी छुट्टी पूरी करने के बाद काम पर वापस आ सकती हैं।
इतना ही नहीं, वह इंग्लिश डिपार्टमेंट की हेड के तौर पर काम पर लौटेंगी। जादवपुर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर चिरंजीव भट्टाचार्य ने इस बारे में कहा कि शाश्वती हल्दर ने 7 जनवरी से 31 जनवरी तक अपनी मर्जी से छुट्टी ली थी। वह कभी भी काम पर आ सकती हैं। यूनिवर्सिटी सूत्रों के मुताबिक यूनिवर्सिटी के अलग-अलग टीचर्स ऑर्गनाइजेशन्स ने शाश्वती को वापस लेने की मांग करते हुए एक मेमोरेंडम दिया था। एग्ज़ाम कराने के लिए एक 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' बनाने का भी फैसला किया गया, ताकि चीटिंग के मामले में एक्शन लेने के अलावा ऐसे विवाद न हों।