

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पाँचवें सेमेस्टर के ‘मेजर’ छात्रों के लिए एक विशेष पूरक परीक्षा आयोजित किए जाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। यह मांग उन छात्रों के लिए उठाई गई है, जो अपने ‘माइनर’ पेपरों में असफल हो गए हैं। प्रस्ताव है कि इस वर्ष एक ‘असाधारण’ उपाय के रूप में उन्हें छठे सेमेस्टर की परीक्षाओं के साथ ही यह सप्लीमेंट्री परीक्षा देने का अवसर दिया जाए, ताकि उनकी शैक्षणिक प्रगति बाधित न हो।
छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोलकाता के कई कॉलेजों के प्रिंसिपलों ने इस मुद्दे पर कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति आशुतोष घोष से संपर्क किया है। प्रिंसिपलों का कहना है कि वर्तमान स्थिति में बड़ी संख्या में छात्र केवल ‘माइनर’ विषयों में असफलता के कारण पूरे सेमेस्टर में फेल हो गए हैं, जबकि उन्होंने अपने ‘मेजर’ पेपरों में अच्छे अंक हासिल किए थे।जानकारी के अनुसार, जिन छात्रों ने ‘माइनर’ विषय के रूप में गणित चुना था, उन्हें पाँचवें सेमेस्टर में ‘मेजर’ पेपरों के साथ-साथ गणित के दो पेपर—MN-III और MN-IV—देना अनिवार्य था। इनमें से MN-IV पेपर पूरी तरह से भौतिकी की अवधारणाओं पर आधारित था, जिससे ‘माइनर’ पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वहीं, MN-III के प्रश्न पत्र को भी अपेक्षाकृत अधिक कठिन बताया जा रहा है।
शिक्षण समुदाय के एक वर्ग का मानना है कि इन दोनों कारणों के चलते बड़ी संख्या में छात्र असफल हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष 142 कॉलेजों के करीब 90,000 छात्र पाँचवें सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से एक बड़े हिस्से को विज्ञान के ‘माइनर’ पेपरों में बैकलॉग का सामना करना पड़ा। इस स्थिति के लिए ‘बोर्ड ऑफ स्टडीज़’ (BoS), प्रश्न पत्रों की गुणवत्ता और मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। न्यू अलीपुर कॉलेज के प्रिंसिपल जयदीप सारंगी ने कहा कि बोर्ड को इस पूरे मामले की गहन समीक्षा करनी चाहिए और ‘माइनर’ पेपर्स के सिलेबस व परीक्षा पैटर्न में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।
वहीं, आशुतोष कॉलेज के प्रिंसिपल मानस कबी ने कुलपति को लिखे पत्र में सुझाव दिया है कि फेल हुए छात्रों के लिए छठे सेमेस्टर के साथ ही एक विशेष सप्लीमेंट्री परीक्षा आयोजित की जाए, ताकि वे सातवें सेमेस्टर में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। लेडी ब्रेबॉर्न कॉलेज की प्रिंसिपल शिउली सरकार ने भी इसे ‘असाधारण परिस्थिति’ बताते हुए विशेष परीक्षा की जरूरत पर जोर दिया। इस बीच, कुलपति ने आश्वासन दिया है कि इस मुद्दे को विश्वविद्यालय की सिंडिकेट बैठक में उठाया जाएगा और छात्रों के हित में आवश्यक कदम जल्द उठाए जाएंगे।