दादी की हिंदी से Gen Z की भाषा तक: शब्द घटे या दायरा बढ़ा?

Gen Z की बातचीत में हिंदी और अंग्रेजी का मेल अब आम है, लेकिन क्या बदलती भाषा का मतलब हिंदी से दूरी है?
आज की पीढ़ी हिंदी को अपने बोलने, लिखने और डिजिटल संवाद के नए अंदाज में अपना रही है।
आज की पीढ़ी हिंदी को अपने बोलने, लिखने और डिजिटल संवाद के नए अंदाज में अपना रही है।Ai generated image
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“तुम कब आओगे?” से लेकर “कब आ रहे हो?” और फिर “कब?” तक। सवाल वही है, लेकिन हर पीढ़ी के साथ उसे कहने का अंदाज थोड़ा बदलता गया। हिंदी भी ऐसी ही है। कभी चिट्ठियों और किताबों की भाषा रही हिंदी अब मोबाइल स्क्रीन पर कभी देवनागरी में, कभी Roman Hindi में और कई बार अंग्रेजी के शब्दों के साथ दिखाई देती है।

14 सितंबर को हिंदी दिवस के मौके पर इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं कि Gen Z हिंदी बोलती है या नहीं, बल्कि यह भी है कि उसकी हिंदी आखिर कैसी है?

क्या 'शुद्ध हिंदी' ही हिंदी है?

रोजमर्रा की बातचीत में हम जिस हिंदी का इस्तेमाल करते हैं, वह अक्सर किताबों में पढ़ी जाने वाली औपचारिक हिंदी से अलग होती है। उसमें दूसरी भाषाओं से आए शब्द, स्थानीय बोलियों के शब्द और समय के साथ प्रचलन में आए नए शब्द शामिल होते रहे हैं। यानी भाषा कभी एक जगह ठहरी नहीं।

आज “भाई, क्या सीन है?”, “मेरा मूड नहीं है” या “ये तो literally बहुत अच्छा है” जैसी बातें सुनना असामान्य नहीं है। यहां हिंदी और अंग्रेजी एक ही बातचीत में साथ चल रही हैं। भाषाविज्ञान में भाषाओं के इस तरह के मेल को code-mixing कहा जाता है। 2024 में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन ने भारतीय सोशल मीडिया पर हिंदी-अंग्रेजी के इसी मेल यानी Hinglish (Hindi+English) के इस्तेमाल का विश्लेषण किया। Hinglish का बढ़ना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि लोग देवनागरी या हिंदी से दूर जा रहे हैं।

फिल्मों से मीम्स तक बदली भाषा

हर पीढ़ी की हिंदी पर उसके समय का असर रहा है। फिल्मों ने कभी “मोहब्बत”, “जनाब” और “हुजूर” जैसे शब्दों को लोकप्रिय बनाया, तो TV और रोजमर्रा की बातचीत ने अपनी अलग बोलचाल गढ़ी। आज सोशल मीडिया का दौर है, जहां एक मीम या रील किसी शब्द या वाक्य को कुछ ही समय में हजारों-लाखों लोगों तक पहुंचा सकती है।

यही वजह है कि Gen Z की हिंदी में सिर्फ अंग्रेजी नहीं, बल्कि अलग-अलग इलाकों की बोलियों और इंटरनेट की नई शब्दावली भी दिखाई देती है। कोई क्षेत्रीय शब्द सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होता है तो वह अपने इलाके से बाहर भी पहुंच जाता है। हिंदी की यह विविधता नई नहीं है, लेकिन डिजिटल दौर ने उसके फैलने की रफ्तार जरूर बदल दी है।

लिखने का तरीका भी बदला

बदलाव सिर्फ शब्दों में नहीं, लिपि के इस्तेमाल में भी दिखाई देता है। “क्या कर रहे हो?” को “kya kar rahe ho?” लिखना डिजिटल बातचीत में आम हो चुका है। इसे Roman Hindi कहा जा सकता है, भाषा हिंदी रहती है, लेकिन उसे रोमन अक्षरों में लिखा जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि जिस डिजिटल दुनिया को अक्सर हिंदी से दूरी के लिए जिम्मेदार माना जाता है, उसी ने हिंदी के नए रूपों को बड़े पैमाने पर जगह भी दी है। मीम्स, शॉर्ट वीडियो, पॉडकास्ट और सोशल मीडिया पोस्ट में हिंदी रोज नए संदर्भों के साथ सामने आती है।

हिंदी दिवस का सवाल अब थोड़ा अलग है

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और उसकी लिपि देवनागरी है। लेकिन 2026 की हिंदी को सिर्फ सरकारी दस्तावेजों या पाठ्यपुस्तकों से समझना शायद अधूरा होगा। घर में बोली जाने वाली हिंदी, दोस्तों की Hinglish, मोबाइल पर लिखी Roman Hindi और सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने वाले क्षेत्रीय शब्द, सब मिलकर आज की भाषा की तस्वीर बनाते हैं।

भाषा का बदलना उसका खत्म होना नहीं है। हर पीढ़ी उसमें अपने समय की आवाज जोड़ती है। शायद इस हिंदी दिवस पर हिंदी को बचाने से ज्यादा जरूरी यह समझना है कि Gen Z उसे किस नए अंदाज में आगे ले जा रही है।

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